77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और यूरोपीय मेहमानों का साक्षी भारत
देश ने रविवार को 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मनाया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ 21 तोपों की सलामी दी गई, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।

नई दिल्ली: देश ने रविवार को 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मनाया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ 21 तोपों की सलामी दी गई, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया। 90 मिनट तक चली इस भव्य परेड ने भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
पहली बार दो मुख्य अतिथि
इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह की एक और विशेषता यह रही कि पहली बार दो विदेशी मुख्य अतिथि शामिल हुए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन कर्तव्य पथ पर उपस्थित रहीं। उनकी मौजूदगी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
30 झांकियों में भारत की विविधता
परेड के दौरान विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां प्रदर्शित की गईं। इन झांकियों में देश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक प्रगति और विकास योजनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक झांकी ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त रूप से दर्शाया।
तीनों सेनाओं की संयुक्त शक्ति
गणतंत्र दिवस परेड में थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से अपनी ताकत और समन्वय का प्रदर्शन किया। परेड के दौरान आधुनिक हथियार प्रणालियों, स्वदेशी सैन्य प्लेटफार्मों और नई बटालियनों को प्रदर्शित किया गया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए घातक वेपन सिस्टम भी पहली बार आम जनता के सामने लाए गए। इस प्रदर्शन में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणाली, सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर, मेन बैटल टैंक अर्जुन और अन्य स्वदेशी सैन्य हार्डवेयर शामिल थे। इन हथियारों ने भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को रेखांकित किया।
आकाश में ताकत का प्रदर्शन: भव्य फ्लाई-पास्ट
परेड का सबसे रोमांचक हिस्सा वायुसेना का फ्लाई-पास्ट रहा। भारतीय वायुसेना के कुल 29 एयरक्राफ्ट इसमें शामिल हुए, जिन्होंने चंडीगढ़ से उड़ान भरकर कर्तव्य पथ के ऊपर से गुजरते हुए विभिन्न फॉर्मेशन बनाए। फ्लाई-पास्ट में राफेल, जगुआर, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई, C295 और अन्य विमान शामिल थे। इन विमानों ने वरुण, अर्जन, सिंदूर और वज्रांग जैसे फॉर्मेशन बनाए, जो तकनीकी कौशल के साथ-साथ सांस्कृतिक और भावनात्मक प्रतीकों से भी जुड़े थे।
सिंदूर फॉर्मेशन का खास संदेश
सिंदूर फॉर्मेशन इस वर्ष का सबसे चर्चित और प्रतीकात्मक दृश्य रहा। भारतीय वायुसेना के दो राफेल, दो सुखोई, दो मिग-29 और एक जगुआर फाइटर एयरक्राफ्ट ने मिलकर यह फॉर्मेशन बनाया। आसमान में यह फॉर्मेशन तिलक के आकार में दिखाई दिया, जो परंपरा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक माना गया।
वज्रांग फॉर्मेशन में छह राफेल लड़ाकू विमान शामिल थे, जबकि अर्जन फॉर्मेशन का नेतृत्व C295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ने किया। वायुसेना अधिकारियों के अनुसार, इन फॉर्मेशन का डिजाइन केवल एयरोडायनामिक्स ही नहीं, बल्कि भावना और संदेश को ध्यान में रखकर तय किया गया था।
नेतृत्व की मौजूदगी
समारोह में देश के शीर्ष राजनीतिक और संवैधानिक पदों पर आसीन नेता मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने परेड को सलामी दी। उनकी उपस्थिति ने लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थागत सम्मान को रेखांकित किया।
‘वंदे मातरम’ थीम का विशेष महत्व
इस वर्ष 77वें गणतंत्र दिवस की थीम ‘वंदे मातरम’ रखी गई थी। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस थीम का चयन किया गया। समारोह के विभिन्न हिस्सों में देशभक्ति, एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
गौरव, शक्ति और एकता का संदेश
77वें गणतंत्र दिवस का यह आयोजन भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और वैश्विक कूटनीतिक भूमिका का प्रभावशाली प्रदर्शन रहा। कर्तव्य पथ से यह संदेश गया कि भारत न केवल अपनी परंपराओं पर गर्व करता है, बल्कि आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भर रक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ भविष्य की ओर आत्मविश्वास से बढ़ रहा है।


