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ईडी की बड़ी कार्रवाई: अल फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ की संपत्ति जब्त, चेयरमैन जावेद सिद्दीकी पर शिकंजा
फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी की करीब 140 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को जब्त (अटैच) कर लिया है। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है। साथ ही अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया गया है। सिद्दीकी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं।

नई दिल्ली/फरीदाबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लालकिला बम विस्फोट मामले से जुड़े कथित आतंकी मॉड्यूल को पनाह देने और उससे संबंधित धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी की करीब 140 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को जब्त (अटैच) कर लिया है। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है। साथ ही अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया गया है। सिद्दीकी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं।
54 एकड़ में फैला पूरा परिसर अटैच
ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी का लगभग 54 एकड़ में फैला पूरा परिसर अटैच किया गया है। इसमें विश्वविद्यालय की मुख्य इमारत, विभिन्न स्कूलों और विभागों से जुड़ी इमारतें, छात्रावास और अन्य संरचनाएं शामिल हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और पढ़ाई पूर्ववत जारी रहेगी। हालांकि, अल फलाह ट्रस्ट अब इन संपत्तियों को न तो बेच सकेगा और न ही किसी अन्य को हस्तांतरित कर पाएगा।
493 करोड़ की संदिग्ध संपत्तियों की जांच जारी
प्रारंभिक आकलन में जब्त संपत्तियों का मूल्य करीब 140 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि जांच के दौरान अब तक लगभग 493 करोड़ रुपये की संदिग्ध और कथित तौर पर आपराधिक तरीके से अर्जित संपत्तियों का पता चला है। ईडी के मुताबिक, इन शेष संपत्तियों को भी अटैच करने की प्रक्रिया जारी है। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में नहीं, बल्कि गहन पड़ताल के दौर में है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।
दिल्ली पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई जांच
ईडी ने यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच 10 नवंबर 2025 को दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर लालकिला बम विस्फोट से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल को कथित तौर पर पनाह देने और उसे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के आरोपों से संबंधित थी। ईडी का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों के सबूत मिले, जिनका संबंध अवैध गतिविधियों और धनशोधन से है।
मान्यता को लेकर झूठे दावे
जांच में यह भी सामने आया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मान्यता प्राप्त होने का झूठा प्रचार किया। ईडी के अनुसार, विश्वविद्यालय की नैक ग्रेडिंग की वैधता समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद संस्थान ने खुद को मान्यता प्राप्त बताकर प्रचार किया। इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम के तहत पूर्ण मान्यता प्राप्त होने का दावा किया, जबकि वह केवल धारा 2(एफ) के अंतर्गत सूचीबद्ध था और 12(बी) के तहत पात्र नहीं था। अधिकारियों के मुताबिक, इन भ्रामक दावों के आधार पर बड़ी संख्या में छात्रों को दाखिले के लिए आकर्षित किया गया।
मेडिकल कॉलेज संचालन में भी नियमों का उल्लंघन
ईडी की जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि विश्वविद्यालय से जुड़े मेडिकल कॉलेज के संचालन में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नियमों का उल्लंघन किया गया। एजेंसी का आरोप है कि गलत और भ्रामक जानकारी देकर आवश्यक स्वीकृतियां हासिल की गईं। इसके बाद छात्रों से फीस के रूप में सैकड़ों करोड़ रुपये वसूले गए। जांच में यह भी सामने आया है कि इस धन का एक बड़ा हिस्सा समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित किया गया और कुछ राशि विदेश भेजे जाने के भी प्रमाण मिले हैं।
अवैध कमाई का माध्यम बना संस्थान
ईडी का कहना है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थान धीरे-धीरे अवैध कमाई के प्रमुख माध्यम बन गए थे। एजेंसी के अनुसार, पूरे नेटवर्क में जावेद अहमद सिद्दीकी की केंद्रीय भूमिका रही। अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और विश्वविद्यालय पर उनका पूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण था, जबकि अन्य पदाधिकारी केवल नाममात्र के तौर पर कार्य कर रहे थे।
जांच जारी, और कार्रवाई के संकेत
ईडी ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे और भी संपत्तियों को अटैच किया जा सकता है तथा अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि धनशोधन, शैक्षणिक संस्थानों के दुरुपयोग और आतंकी गतिविधियों से जुड़े इस नेटवर्क की परतें अभी पूरी तरह खुली नहीं हैं। आने वाले दिनों में जांच के दायरे के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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