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मप्र : कोरोना के दौर में पढ़ाई के बेहतर तरीके की तलाश

देश के अन्य हिस्सों की तरह मध्य प्रदेश में भी कोरोना संक्रमण का असर शिक्षा पर पड़ रहा है और ऑनलाइन शिक्षा ने छात्रों के सामने कई तरह की समस्याएं पैदा कर दी हैं।

मप्र : कोरोना के दौर में पढ़ाई के बेहतर तरीके की तलाश
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भोपाल | देश के अन्य हिस्सों की तरह मध्य प्रदेश में भी कोरोना संक्रमण का असर शिक्षा पर पड़ रहा है और ऑनलाइन शिक्षा ने छात्रों के सामने कई तरह की समस्याएं पैदा कर दी हैं। छात्रों की समस्याएं दूर हो और वो बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई जारी रख सकें, इसके प्रयास शुरू हो गए हैं। पढ़ाई के नए और बेहतर तरीके भी खोजे जा रहे हैं। कोरोना महामारी के कारण देश के अन्य हिस्सों की तरह मध्य प्रदेश में भी आठवीं तक के स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह बंद है। ऑनलाइन पढ़ाई के साथ मोहल्ला कक्षाएं भी लगाई जा रही हैं तो दूसरी ओर नवमी से 12वीं तक के सीमित संख्या में छात्र स्कूल जा सकते हैं मगर इसके लिए उनके परिजनों को लिखित में अनुमति देनी पड़ रही है।

बच्चों को लंबे समय तक मोबाइल पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करने से कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। कई बच्चे ऐसे हैं जिनके पास मोबाइल ही नहीं है, जिनके पास मोबाइल है वे ज्यादा देर तक ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं तो आंखों में दर्द होता है, इतना ही नहीं, उन्हें शिक्षकों द्वारा कहीं बातें समझ में भी नहीं आती हैं।

बच्चों के अधिकारों की पैरवी करने वाली संस्था चाइल्ड राइट ऑब्जर्वेटरी भी बच्चों की समस्याओं का निदान करने की पहल कर रही हैं, साथ ही उसकी ओर से यह प्रयास किए जा रहे हैं कि पढ़ाई का तरीका ऐसा अपनाया जाए जिससे बच्चों को मुसीबतों के दौर से न गुजरना पड़े।

चाइल्ड राइट ऑब्जर्वेटरी की अध्यक्ष और प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच का कहना है कि बच्चे कितनी देर ऑनलाइन पढ़ाई करें, जिससे उन्हें तकलीफ न हो, इसके लिए चिकित्सकों से परामर्श लिया जाए। साथ ही पढ़ाई का कुछ काम टेक्स्ट के तौर पर दिया जाए, यानि कि यह पढ़ाई ऑफलाइन हो। यह कैसे संभव हो सकता है, इस दिशा में प्रयास जरुरी है। इसके लिए सरकार से भी संवाद किया जाएगा।


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