मातृभाषा हमारी मां समान उसकी सुरक्षा हमारा कर्तव्य : पद्मा सचदेव
साहित्य अकादेमी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आज एक बहुभाषी कवि सम्मिलन आयोजित किया गया। बहुभाषी कवि सम्मिलन में 23 भारतीय भाषाओं के कवियों को आमंत्रित किया गया था

नई दिल्ली। साहित्य अकादेमी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर आज एक बहुभाषी कवि सम्मिलन आयोजित किया गया। बहुभाषी कवि सम्मिलन में 23 भारतीय भाषाओं के कवियों को आमंत्रित किया गया था। प्रख्यात डोगरी कवयित्री पद्मा सचदेव ने इस सम्मिलन का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन वक्तव्य में उन्होंने कहा कि मातृभाषा हमारी मां के समान है और उसकी सुरक्षा हमारा कत्तव्र्य है। उन्होंने इस बात पर दुख प्रकट किया कि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा का प्रयोग नहीं कर रही है, जिससे उनके लुप्त होने का ख़तरा बढ़ता जा रहा है।
डोगरी के प्रख्यात कवि दीनू भाई पंत की पंक्ति को उद्धृत करते हुए पद्मा सचदेवने कहा कि डोगरी हमारी मां है तो हिंदी हमारी दादी। उन्होंने डोगरी में अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं और कुछ डोगरी कविताओं के हिंदी अनुवाद भी प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्य अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि मातृभाषा से हमारी सांस्कृतिक पहचान बनती है और वह ही हमारी संस्कृति और संस्काररों की संवाहक है। साहित्य अकादेमी 24 भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अन्य वाचिक और क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती है। सभी आमंत्रित कवियों ने एक कविता अपनी मूल भाषा में प्रस्तुत कीं और अन्य कविताओं के हिंदी या अंग्रेजी अनुवाद पढ़े।
कविता-पाठ करने वाले कवि/कवयित्री थे - जीबन नारा (असमिया), देवकांत रामचियारी (बोडो), गणेश बिसपुते (मराठी), अनामिका (हिंदी), तहसीन मुनव्वर (उर्दू), सुजाता चौधरी (ओडिय़ा), मोहन हिमथाणी (सिंधी), प्रतिभा नंद कुमार (कन्नड), मालचंद तिवाड़ी (राजस्थानी), हरीश मीनाश्रु (गुजराती), अरिबम मेम्चोबी (मणिपुरी), फेलोमिना सेम्फ्रांसिस्को (कोंकणी), उत्तम कुमार क्षेत्री (नेपाली), वनीता (पंजाबी), याकूब (तेलुगु), अनीता थम्पी (मलयाळम्), रमन कुमार सिंह (मैथिली), रवि सुब्रमण्यन (तमिऴ), गोबिंद चंद्र माझी (संताली) और रमाकांत शुक्ल (संस्कृत)। कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादेमी के संपादक (हिंदी) अनुपम तिवारी ने किया।


