Top
Begin typing your search above and press return to search.

पीएसबी को 2.1 लाख करोड़ तक पूंजी की जरूरत- मूडीज

देश इस वक्त चौतरफा मुसीबत से घिरा हुआ है. सबसे बड़ी परेशानी गिरती अर्थव्यवस्था की है. जिसकी वजह से बैंकों और एमएसएमई सेक्टर की भी हालत खराब है. यही वजह है कि तमाम कंपनियां और बैंक डूब की कगार पर आ गए हैं

पीएसबी को 2.1 लाख करोड़ तक पूंजी की जरूरत- मूडीज
X

देश इस वक्त चौतरफा मुसीबत से घिरा हुआ है. सबसे बड़ी परेशानी गिरती अर्थव्यवस्था की है. जिसकी वजह से बैंकों और एमएसएमई सेक्टर की भी हालत खराब है. यही वजह है कि तमाम कंपनियां और बैंक डूब की कगार पर आ गए हैं. जिसे संभालने के लिए सरकार कदम उठाती नजर नहीं आ रही है. लेकिन मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने सरकार को सलाह दी है. साथ ही वो आंकड़े सामने आए हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि सरकार बेकार, एजेंसियां बनी सलाहकार..महामारी के दौर ने देश के हर सेक्टर को झटका दिया है. ऑटोमोबाइल, फूड, पर्यटन हर क्षेत्र को लेकर नुकसान हो रहा है. वहीं बैंकिंग और एमएसएमई सेक्टर के खराब हालात ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया है. किसी भी सेक्टर को सरकार मुसीबत से बाहर नहीं निकाल पा रही है, ये हालात अब सभी के लिए चिंता का सबब बन गए हैं. हर कोई कह रहा है कुछ तो करो सरकार, कंपनियों और बैंकों को बेचने की बजाय उनकी स्थिति सुधारो सरकार, अब मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भी सरकार को यही सलाह दी है. मूडीज ने कहा कि कमजोर पूंजीगत भंडार को देखते हुए सरकारी बैंकों को दो साल में 2.1 लाख करोड़ रुपये तक बाहरी पूंजी की जरूरत होगी. इसके लिए सरकारी समर्थन सबसे अधिक भरोसेमंद स्रोत होगा. मूडीज की उपाध्यक्ष अल्का अंबरासू ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में 2020-21 के दौरान तेजी से गिरावट आएगी. हालांकि, 2021-22 में अर्थव्यवस्था में मामूली सुधार देखने को मिल सकता है. लेकिन उससे पहले मोदी सरकार को बड़ा कदम उठाना होगा. उसे आर्थिक मदद करनी होगी…जहां एक तरफ मूडीज चेतावनी दे रहा है, तो वहीं आंकड़े भी बता रहे हैं कि व्यापार की रफ्तार थम गई है. आंकड़े बताते हैं कि देश के 6.30 करोड़ एमएसएमई यूनिटों में से 90 फीसदी ने काम करना शुरू कर दिया है लेकिन इनमें से 25 फीसदी ही अपनी 50 फीसदी क्षमता के साथ काम कर पा रही हैं.. इसका कारण मांग में कमी, लॉजिस्टिक की दिक्कतें और फंड की कमी है. फाउंडेशन फॉर एमएसएमई क्लस्टर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर तमाल सरकार का कहना है कि 85 फीसदी एमएसएमई यूनिट घर से काम करती हैं और बैंकों तक उनकी पहुंच काफी कम हैं. सरकार ने जो लिक्वडिटी पैकेज दिया है वो उसका लाभ लेने में सक्षम नहीं हैं. सरकार को इनके लिए अलग से फंड या फास्ट ट्रैक मुद्रा का ऑप्शन देना चाहिए ताकि एमएसएमई को मजबूती मिले...ये आंकड़ें साफ बयां कर रहे हैं कि देश मुसीबत में घिरा है.और अगर सुधार नहीं हुआ तो करोड़ों लोगों पर इसका असर होगा. क्योंकि देश में एमएसएमई सेक्टर लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है. देश के निर्यात में 50 फीसदी और जीडीपी में इसकी 30 फीसदी हिस्सेदारी है..अब देखना होगा कि इन चेतावनियों के बाद सरकार क्या कदम उठाती है.


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it