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सरकारी कंपनियों के बाद जमीन भी बेचेगी सरकार

सरकार निजीकरण की प्रक्रिया को अब और तेज कर रही है. इसके लिए राष्ट्रीय मौद्रीकरण योजना की शुरुआत की गई है. जिसमें देश के तमाम उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपा जाएगा. कोशिश 6 लाख करोड़ रुपए जुटाने की हैं. सरकार सार्वजनिक कंपनियों को ही निजी हाथों में नहीं देगी, बल्कि उनकी जमीन को भी बेचने की तैयारी शुरू हो गई है.

सरकारी कंपनियों के बाद जमीन भी बेचेगी सरकार
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पहले निजी निवेश के नाम पर सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपा जाएगा और फिर सरकारी जमीन भी बेची जाएगी. जीहां मोदी सरकार अब सरकारी जमीन बेच कर पैसा कमाने की नीति बना रही है. सरकार का टारगेट है कि जमीन बेचकर 600 करोड़ रुपए जुटाए जाएं. सरकारी जमीन बेचने का काम वित्त मंत्रालय के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग यानी दीपम को सौंपा गया है. दीपम इसके लिए बीएसएनएल, एमटीएनएल, बीईएमएल, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया सहित अन्य सरकारी संस्थानों की जमीन को बेचने के लिए अंतिम मंजूरी लेने जा रही है. मंजूरी मिलने के बाद ई-बिडिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए जमीन बेचने की शुरूआत की जाएगी. वैसे दावा किया जा रहा है कि जमीन बेचने की मंजूरी जल्दी ही मिल जाएगी. सरकारी जमीन को बेचने की प्रक्रिया उसी तरह होगी जैसे नीति आयोग ने करोड़ों रुपये की संपत्ति के मोनेटाइज़ेशन का काम किया है. मोनेटाइजेशन पाइप लाइन योजना के नाम पर मोदी सरकार ट्रांसमिशन लाइन, टेलिकॉम टावर, गैस पाइपलाइन, हवाई अड्डे, कई सरकारी उपक्रमों सहित कई कंपनियां और उनकी संपत्तियों को बेचने या लीज पर देने की तैयारी कर चुकी है. सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने के सरकार के ऐलान के बाद विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेर रहा है. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा पिछले 70 सालों में जो कुछ बनाया गया है उसे अगले 12-24 महीनों में मोदी सरकार व्यापारी घरानों को सौंप देगी. ऐसी पॉलिसी को बनाने से पहले किसी से सलाह नहीं ली गई थी. संसद में भी इस पर बात नहीं की गई. और पेगासस की तरह मोदी सरकार कभी भी इस पर संसद में चर्चा भी नहीं होनी देगी. क्योंकि इस योजना के पीछे सरकार का कोई गुप्त एजेंडा है.


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