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मासिक धर्म पर चुप्पी तोड़ने के अभियान का लाखों लोगों ने किया समर्थन

यूनिसेफ ने महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर समाज मे फैली गलत धारणाओं को तोड़ने के लिए एक ‘रेड डॉट चैलेंज’ अभियान चलाया है जिसका 32 लाख लोगोने समर्थन किया है और उम्मीद है कि यह संख्या 19 करोड़ से अधिक जाएगी

मासिक धर्म पर चुप्पी तोड़ने के अभियान का लाखों लोगों ने किया समर्थन
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नयी दिल्ली। यूनिसेफ ने महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर समाज मे फैली गलत धारणाओं को तोड़ने के लिए एक ‘रेड डॉट चैलेंज’ अभियान चलाया है जिसका 32 लाख लोगोने समर्थन किया है और उम्मीद है कि यह संख्या 19 करोड़ से अधिक जाएगी।

यूनिसेफ ने गुरुवार को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर एक प्रेस विज्ञपति में यह जानकारी दी। विज्ञपति में कहा गया है कि कोरोना संकट के बीच, मासिक धर्म और स्वच्छता के मुद्दों के महत्व को पहचानने और किशोर लड़कियों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर ध्यान देने के लिए यूनीसेफ इंडिया ने इस वर्ष हैशटैग ‘रेड डॉट चैलेंज’ को फिर शुरु किया है।

यूनीसेफ इंडिया की प्रतिनिधि, डॉ. यास्मीन अली हक ने कहा,“मासिक धर्म पर चुप्पी की संस्कृति कोविड 19 महामारी के दौरान और भी ज़ाहिर हो गई है। समाज के आर्थिक रूप से वंचित वर्गों की लाखों महिलाओं और लड़कियों को सुरक्षित रूप से, स्वच्छता के साथ और गरिमा के साथ अपने मासिक धर्म का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है। कई बेरोजगार हैं और मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों तक बहुत कम पहुंच के साथ घर से दूर फंसी हुई हैं।चुप्पी तोड़ना, जागरूकता बढ़ाना और नकारात्मक सामाजिक मानकों को बदलना अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यूनीसेफ, अपने सहयोगियों के साथ इस चुप्पी को तोड़ने में मदद कर रहा है।”

इस वर्ष, इंस्टाग्राम अभियान डिजिटल इन्फ्लूएन्सर के सहयोग से है, सामाजिक बदलाव के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करके यूनीसेफ सोशल मीडिया के माध्यम से 32 लाख लोगों तक पहुंच गया। कई और हस्तियों और प्रभावशाली लोगों के चुनौती में शामिल होने के बाद, इसकी संभावित पहुंच 19 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है। यूनीसेफ की राष्ट्रीय युवा ऐम्बैसडर, हेमा दास, मशहूर हस्तियों मानुषी छिल्लर और दीया मिर्जा, साथ ही अदिति राव हैदरी, डायना पेंटी, नीरू बाजवा ने भी अपना समर्थन दिया है। डिजिटल हस्ती सेजल कुमार, मेघना कौर, आशना श्रॉफ और कई अन्य लोगों ने भी इस मुद्दे का समर्थन किया।

चुप्पी तोड़ने के महत्व पर जोर देते हुए, यूनीसेफ की राष्ट्रीय युवा ऐम्बैसडर, हेमा दास ने कहा,“चुप्पी और कलंक की संस्कृति अभी भी समय की सामान्य जैविक प्रक्रिया के साथ है। चुप्पी तोड़ने और मिथकों को दूर करने के लिए इस अभियान के साथ आगे बढ़ाने के लिए मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मासिक धर्म जीवन के लिए जरूरी है।”

महाराष्ट्र में, यूनीसेफ ने मुंबई की शहरी गंदी बस्तियों में किशोर लड़कियों और सेक्स वर्करों को 200000 सेनेटरी पैड के वितरण में मदद की और शहरी गंदी बस्तियों में 25 लाख लोगों तक सुरक्षित स्वच्छता प्रथाओ के बारे में जानकारी दी।राजस्थान की मासिक धर्म स्वच्छता योजना के तहत, 10 लाख स्वच्छाग्रहियों, शिक्षकों और एसएचजी सदस्यों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। विशेष रूप से, झारखंड सरकार ने राज्य भर में 10-19 वर्षों के बीच स्कूल जाने वाली किशोरियों के लिए अगले तीन महीनों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड वितरण की पहल की घोषणा की है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 78 प्रतिशत की तुलना में केवल 48 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएँ सेनेटरी पैड का उपयोग कर रही थीं।


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