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'मन की बात' में नीट पर चुप्पी क्यों? कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने पूछा सवाल

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए शुक्रवार को पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी तक लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात क्यों नहीं की है

मन की बात में नीट पर चुप्पी क्यों? कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने पूछा सवाल
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मुंबई। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए शुक्रवार को पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी तक लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात क्यों नहीं की है, जबकि वांगचुक ने भी नीट पेपर लीक को लेकर वही चिंताएं जताई हैं जो कांग्रेस ने जताई थीं।

सपकाल ने मीडिया से बात करते हुए अपनी पार्टी के रुख का पुरजोर बचाव किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

कांग्रेस के विपक्ष के नेता राहुल गांधी वांगचुक से मिलने के सवाल पर सपकाल ने केंद्र सरकार की उदासीनता की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने बताया कि वांगचुक नीट पेपर लीक घोटाले को लेकर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।सपकाल ने पत्रकारों को याद दिलाया कि जब वांगचुक ने पहले लद्दाख के संवैधानिक सुरक्षा उपायों के लिए विरोध प्रदर्शन किया था तो भाजपा सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में ले लिया था।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' संबोधन में नीट मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा।" दोष हटाने के लिए कांग्रेस को वांगचुक से जोड़ने की कोशिश करना बहुत भ्रामक है।

सपकाल ने बताया कि राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ की जोरदार मांग के लिए 'छात्रों की गूंज' नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।

शिवसेना (यूबीटी) द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को अपने आगामी राम रक्षा आंदोलन में आमंत्रित करने के मुद्दे पर बात करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष ने महाराष्ट्र की सत्ताधारी गठबंधन सरकार की धार्मिक साख पर सीधा हमला किया।

सपकाल ने कहा, "भाजपा और आरएसएस 'राम नाम जपना, पराया माल अपना' (राम का नाम जपना और दूसरों की संपत्ति हड़पना) की नीति अपनाते हैं। अयोध्या के राम मंदिर में हुई भारी चोरी में मोदी सरकार द्वारा सीधे नियुक्त किए गए लोग शामिल हैं। भाजपा और आरएसएस इस मामले पर दोषी जैसी चुप्पी साधे हुए हैं।"

उन्होंने अयोध्या मंदिर चोरी की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) को खारिज करते हुए इसे भाजपा सरकार की कठपुतली बताया और कहा कि यह कभी भी असली दोषियों को नहीं पकड़ पाएगी।

उन्‍होंने चुनौती दी कि अगर मुख्यमंत्री और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत में हिम्मत है तो उन्हें निमंत्रण स्वीकार करना चाहिए और उद्धव ठाकरे के राम रक्षा कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए।"

कांग्रेस नेता ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह के बारे में चल रही अफवाहों को ज्‍यादा महत्व नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल और सांसद सुप्रिया सुले सहित एनसीपी-एसपी के शीर्ष नेताओं ने पहले ही अपनी पार्टी का मजबूत रुख स्पष्ट कर दिया है और मीडिया को अफवाहों के बजाय उनके आधिकारिक बयानों पर भरोसा करना चाहिए।


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