बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की वारिस पठान ने की कड़ी निंदा
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर देश में सियासी बयानबाजी तेज है

एआईएमआईएम नेता का बयान- दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे बांग्लादेश सरकार
- केकेआर में बांग्लादेशी खिलाड़ी को लेकर वारिस पठान ने उठाए सवाल
- नीतीश राणे पर हमला, वारिस पठान बोले- ‘नफरती चिंटू’ और संविधान की परवाह नहीं
- महाराष्ट्र चुनाव प्रचार पर वारिस पठान का तंज- उर्दू भाषा को अब बढ़ावा दे रही शिवसेना
मुंबई। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर देश में सियासी बयानबाजी तेज है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) नेता वारिस पठान ने गुरुवार को बांग्लादेश सरकार से सख्त कार्रवाई का आग्रह किया।
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा, "मैं बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें मॉब लिंचिंग और हत्याओं की घटनाएं शामिल हैं। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने या इस तरह से किसी को भी मारने का अधिकार नहीं है। मैं बांग्लादेश सरकार से इन घटनाओं पर ध्यान देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं।"
उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के एक बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदने पर कहा, "शाहरुख खान की एक टीम है जिसका नाम कोलकाता नाइट राइडर्स है। पिछले कुछ सालों में उन्होंने खिलाड़ियों को चुना है, यह तय किया है कि किसे लेना है और क्यों, ये टीम के अंदरूनी मामले हैं, हालांकि सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या बांग्लादेश के खिलाड़ियों को शामिल किया जाना चाहिए। पहले, भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने की इजाजत दी थी, जबकि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पहले पहलगाम में हमारे बेगुनाह नागरिकों पर हमले किए थे।"
वारिस पठान ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नीतीश राणे के हालिया बयान पर कहा, "नीतीश राणे को सिर्फ नफरत फैलाने की आदत है। उन्होंने कभी विकास या तरक्की की बात नहीं की। मैंने भाजपा में नफरत फैलाने वाले ऐसे लोगों को 'नफरती चिंटू' नाम दिया है। अब उन्होंने वारिस पठान को बिच्छू कहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि नीतीश राणे किस रंग का बिच्छू है? वह संविधान की परवाह किए बिना डंक मार रहा है।"
महाराष्ट्र निकास चुनाव में प्रचार को लेकर उन्होंने कहा, "चीजें बदलती हैं, जैसे आसमान का रंग बदलता है। कल तक कुछ लोग उर्दू भाषा से नफरत करते थे। आज उद्धव ठाकरे की पार्टी के उम्मीदवार उर्दू को बढ़ावा दे रहे हैं, उर्दू में पंफलेट बांट रहे हैं और उर्दू भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।"


