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सहारनपुर मस्जिद विवाद पर भड़के वारिस पठान, बोले- संविधान का गला घोंटा गया

सहारनपुर में गैर-कानूनी मस्जिद गिराए जाने पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र की हत्या बताते हुए कहा कि 1911 से मौजूद मस्जिद में 3 सितंबर तक नमाज पढ़ी जा रही थी

सहारनपुर मस्जिद विवाद पर भड़के वारिस पठान, बोले- संविधान का गला घोंटा गया
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मुंबई। सहारनपुर में गैर-कानूनी मस्जिद गिराए जाने पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र की हत्या बताते हुए कहा कि 1911 से मौजूद मस्जिद में 3 सितंबर तक नमाज पढ़ी जा रही थी, जिसे साजिश के तहत गिराया गया। साथ ही राम मंदिर ट्रस्ट पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए भाजपा पर नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, "उन्होंने जो वक्फ कानून बनाया है, वह पूरी तरह से गलत है। इसमें यूजर द्वारा वक्फ का जिक्र है। कल तक सहारनपुर मस्जिद में नमाज पढ़ी जा रही थी। आप कौन सा कानून मान रहे हैं? आप हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को नहीं मान रहे हैं। मुझे लगता है कि आज काला दिन है।"

राम मंदिर को लेकर वारिस पठान ने कहा, "एक बड़ा मंदिर बनाया, एक ट्रस्ट बनाया और करोड़ों की धोखाधड़ी की। हिंदुओं की आस्था को तार-तार किया गया। उनकी आस्था का गला घोंटा गया। इन लोगों ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। एसआईटी रिपोर्ट आई, चंपत गायब हो गए और अब आपने किसी और को नियुक्त कर दिया है।"

भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा बैकफुट पर है। उन्हें बस नफरत फैलाना और मस्जिदों के खिलाफ एक्शन लेना आता है। इस बार वोटर इसे स्वीकार नहीं करेंगे। भाजपा और सीएम योगी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

सहारनपुर में एक गैर-कानूनी मस्जिद गिराए जाने पर वारिस पठान ने कहा कि मैं सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद को गिराने की निंदा करता हूं। सहारनपुर में जो हुआ, वो देश ने देखा। आज फिर संविधान का गला घोंटा गया। लोकतंत्र की हत्या की गई और कानून-कायदों की धज्जियां उड़ाई गईं।

उन्होंने आगे कहा कि हमारी मस्जिद को एक साजिश के तहत गिरा दिया गया। सुबह 5 बजे मस्जिद पर एक्शन लिया गया। लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने दिया गया और कहा गया कि इसे सील किया जा रहा है। मस्जिद 1911 से थी, आजादी से पहले से। 3 सितंबर तक वहां मस्जिद थी और नमाज पढ़ी जा रही थी।


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