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मुंबई में छात्रों के समर्थन में एकजुट हुए उद्धव और राज ठाकरे, NEET आंदोलन की सफलता पर निकाला विजय मार्च

मार्च के दौरान आंदोलन में शामिल छात्रों के समर्थन में नारे लगाए गए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग दोहराई गई। कार्यक्रम के दौरान उन छात्रों को भी श्रद्धांजलि दी गई जिनकी मौत का संबंध आंदोलन और परीक्षा विवाद के संदर्भ में बताया गया।

मुंबई में छात्रों के समर्थन में एकजुट हुए उद्धव और राज ठाकरे, NEET आंदोलन की सफलता पर निकाला विजय मार्च
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मुंबई: नीट परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन के समर्थन में रविवार को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से विजय मार्च निकाला। लंबे समय बाद दोनों ठाकरे नेताओं की एक मंच पर मौजूदगी राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा का विषय रही। रैली में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और दोनों दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के दौरान आंदोलन में शामिल छात्रों के समर्थन में नारे लगाए गए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग दोहराई गई। कार्यक्रम के दौरान उन छात्रों को भी श्रद्धांजलि दी गई जिनकी मौत का संबंध आंदोलन और परीक्षा विवाद के संदर्भ में बताया गया।

राज ठाकरे बोले- युवाओं ने अपनी ताकत दिखा दी

रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि हालिया छात्र आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि देश की नई पीढ़ी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया है कि सरकारों को शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेह होना पड़ेगा। राज ठाकरे ने कहा कि आंदोलन की सफलता केवल एक मांग पूरी होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने देशभर के छात्रों को एक साझा मंच पर लाकर शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस शुरू कर दी है।

आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं ने अपनी एकजुटता से व्यवस्था को जवाबदेह बनने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सवाल पूछने से पीछे नहीं हटेगी और शिक्षा, रोजगार तथा शासन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात मजबूती से रखेगी। उन्होंने दावा किया कि हालिया घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युवा लोकतांत्रिक तरीकों से बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। साथ ही उन्होंने सरकार की विभिन्न नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि जनता अब जवाब चाहती है।

पहले भी छात्रों के समर्थन में उतरे थे ठाकरे बंधु

इससे पहले आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने छात्र आंदोलन का समर्थन किया था। उद्धव ठाकरे ने कहा था कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। वहीं, राज ठाकरे ने कहा था कि छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है और सरकार के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा था कि शिक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

NEET विवाद से शुरू हुआ आंदोलन

देशभर में छात्र आंदोलन की शुरुआत NEET परीक्षा से जुड़े विवादों के बाद हुई। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच विभिन्न छात्र संगठनों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू किए। बाद में कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भी इस अभियान का समर्थन किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले लंबे आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद कई राज्यों में भी छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।

सरकार ने सुधारों का दिया आश्वासन

छात्र आंदोलन और बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठाने की बात कही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का कहना है कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।


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