Top
Begin typing your search above and press return to search.

महाराष्ट्र दौरे पर टिकैत, किसानों की आत्महत्या पर चिंता

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने महाराष्ट्र दौरे के दौरान एक बार फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराई

महाराष्ट्र दौरे पर टिकैत, किसानों की आत्महत्या पर चिंता
X

एमएसपी कानून ही किसानों की सबसे बड़ी मांग: टिकैत

  • भूमि अधिग्रहण पर सरकार को घेरा, मुआवजे में धांधली का आरोप
  • अमेरिका से व्यापारिक डील पर जताई आशंका, किसानों को नुकसान का डर

नांदेड़। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने महाराष्ट्र दौरे के दौरान एक बार फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की फसलों की कीमतों को कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक देश का किसान संतुष्ट नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सहित पूरे देश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और यही वजह है कि किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

नांदेड़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि किसान संगठन लगातार महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को उठा रहा है। उन्होंने कहा कि नांदेड़ के बाद उनका कार्यक्रम अकोला सहित राज्य के अन्य हिस्सों में भी है। महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल है जहां किसानों की आत्महत्या के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। यहां पैदावार भी कम हो रही है और किसानों को फसलों का उचित दाम भी नहीं मिल रहा।

उन्होंने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून किसानों की सबसे बड़ी मांग है। जब तक यह कानून लागू नहीं होगा, तब तक किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ेगी। उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों से इस लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश के किसानों का मुद्दा है।

भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि देशभर में तेजी से भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल रहा। कई जगह अब भी 2013 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि कानून के मुताबिक किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए। कई स्थानों पर किसानों को केवल दो गुना मुआवजा देकर उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है।

अमेरिका के साथ संभावित व्यापारिक समझौते का जिक्र करते हुए टिकैत ने आशंका जताई कि यदि इस तरह की डील लागू होती है तो अमेरिका से अनाज, फल, मेवा और अन्य कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में भारत आएंगे, जिससे भारतीय किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यदि विदेशी कृषि उत्पादों पर शून्य प्रतिशत शुल्क रहेगा और भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक शुल्क लगेगा, तो इसका सीधा नुकसान देश के किसानों को उठाना पड़ेगा।

संसद में लंबित कृषि से जुड़े विधेयकों का विरोध करते हुए टिकैत ने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक, सीड बिल और पेस्टिसाइड बिल सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे किसानों के लिए चिंता का विषय हैं। दिल्ली में हुए किसान आंदोलन के दौरान बिजली संशोधन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब इसे फिर से सदन के पटल पर लाया गया है। एमएसपी गारंटी कानून, भूमि अधिग्रहण, अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौता और ये तीनों विधेयक किसानों के सामने सबसे बड़े मुद्दे हैं और इन्हीं विषयों को लेकर किसान संगठन देशभर में जनसंपर्क अभियान चला रहा है।

आंदोलन की आगामी रणनीति पर पूछे गए सवाल के जवाब में टिकैत ने कहा कि फिलहाल विभिन्न राज्यों में बैठकों का दौर चल रहा है। जब कोई अंतिम निर्णय होगा, तब उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। किसान संगठन सरकार को लगातार पत्र लिख रहा है और विपक्षी दलों को भी ज्ञापन देकर इन मुद्दों को संसद में उठाने और बहस कराने की मांग कर रहा है।

दिल्ली में हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन पर राकेश टिकैत ने कहा कि वह आंदोलन उचित था और उनके संगठन ने आंदोलन का पूरा समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह युवाओं का आंदोलन था, इसलिए उन्होंने बड़ी संख्या में अपने कार्यकर्ताओं को वहां नहीं भेजा, लेकिन बाहर से हरसंभव सहयोग दिया।

सीजेपी की विदेशी फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर टिकैत ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी फंडिंग की जानकारी नहीं है। आंदोलन के दौरान यदि कोई लोगों के लिए पानी, भोजन, बिस्कुट या अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा देता है, तो उसे विदेशी फंडिंग नहीं कहा जा सकता। सीजेपी के आंदोलन को उनका समर्थन जारी रहेगा क्योंकि नई पीढ़ी अपने मुद्दों की लड़ाई बेहतर तरीके से लड़ना जानती है।

अभिजीत दीपके को पाकिस्तानी एजेंट बताए जाने के आरोपों पर टिकैत ने कहा कि आरोप लगते रहते हैं। मेरे ऊपर भी अमेरिका और कनाडा से जुड़े होने जैसे आरोप लगाए गए थे, इसलिए इस तरह के आरोपों को वह गंभीरता से नहीं लेते।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it