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हिंदू परंपराओं के खिलाफ खड़े लोगों को इतिहास से सीख लेनी चाहिए : संजय निरुपम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोमनाथ मंदिर के विनाश और पुनर्निर्माण पर लिखे गए ब्लॉग की शिवसेना नेता संजय निरुपम ने सराहना की

हिंदू परंपराओं के खिलाफ खड़े लोगों को इतिहास से सीख लेनी चाहिए : संजय निरुपम
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मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोमनाथ मंदिर के विनाश और पुनर्निर्माण पर लिखे गए ब्लॉग की शिवसेना नेता संजय निरुपम ने सराहना की। उन्होंने कहा कि गुजरात का प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर भारत पर हुए विदेशी आक्रमणों और हिंदू विरोधी अभियानों का एक जीवंत ऐतिहासिक उदाहरण है। हिंदू परंपराओं के खिलाफ खड़े लोगों को इतिहास से सीख लेनी चाहिए।

संजय निरुपम ने कहा कि वर्ष 1026 में अफगानिस्तान से आए महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर हमला कर लूटपाट और विनाश किया, मंदिर को तोड़ा और वहां से सोना, चांदी सहित कीमती सामान ले गया। बाद में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। यह एक ऐतिहासिक संयोग है कि अब सोमनाथ पर हुए हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और इसे याद किया जाना चाहिए, ताकि जो लोग जिहादी दबाव और प्रभाव में आकर हिंदू परंपराओं के खिलाफ खड़े होते हैं, उन्हें इतिहास से सीख मिल सके।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा डीएमके सरकार पर की गई टिप्पणियों का समर्थन करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे के नेतृत्व वाली सरकार ने कुछ समय पहले सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी। सनातन धर्म लगभग 5,000 साल पुराना है, जिसे करोड़ों लोग मानते हैं और जिसकी समृद्ध परंपरा और संस्कृति रही है। केवल कुछ वोट हासिल करने के लिए इस तरह की तुलना करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी सजा तमिलनाडु की जनता आने वाले चुनाव में देगी और स्टालिन व उनके बेटे के कुशासन और भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकेगी।

शिवसेना नेता ने ठाकरे बंधुओं पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हिंदू सम्राट बालासाहेब ठाकरे ने हिंदुत्व के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था, लेकिन आज उनके नाम पर बड़ी गद्दारी की जा रही है, जिसे मुंबई की जनता नकार देगी। उन्‍होंने छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हिंदुओं के लिए पूजनीय देवता समान हैं और उन्होंने उस दौर में हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की, जब मुगलों का आतंक फैला हुआ था।

उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने कभी किसी भाषा का विरोध नहीं किया। उनके राज्याभिषेक के समय उत्तर प्रदेश के बनारस से विद्वानों को बुलाया गया था और उस समय भाषा को लेकर कोई विवाद नहीं था। निरुपम ने आरोप लगाया कि आज मराठी लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए हिंदी का विरोध किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हिंदी के बहाने हिंदुत्व से नाता तोड़ने की कोशिश की जा रही है और इसका मकसद हिंदू समाज में विभाजन पैदा करना है।

संजय निरुपम ने कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव के दौरान जारी होने वाले घोषणा पत्र को वचननामा कहा जाता है, लेकिन ठाकरे बंधुओं द्वारा जारी वचननामा असल में “पचननामा” है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूबीटी गुट ने 25 साल तक मुंबई महानगर पालिका की तिजोरी को लूटा और पचाया। उनके मुताबिक, यह पचननामा आने वाले दिनों में और अधिक लूट को कैसे अंजाम दिया जाए, उसका पूरा दस्तावेज है, जिसमें कई ऐसी घोषणाएं शामिल हैं जो उनके कार्यक्षेत्र से बाहर हैं।


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