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महंगाई-बेरोजगारी से जनता परेशान, पीएम मोदी विदेश यात्रा में व्यस्त: आनंद दुबे

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने पीएम नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे को लेकर सवाल उठाए।

महंगाई-बेरोजगारी से जनता परेशान, पीएम मोदी विदेश यात्रा में व्यस्त: आनंद दुबे
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मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने गुरुवार को पीएम नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता यहां महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हो रही है और पीएम मोदी हैं कि विदेश दौरे में लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 5 दिनों से प्रधानमंत्री मोदी विदेश दौरे पर थे और इस दौरान देश के अंदर महंगाई, बेरोजगारी और आम लोगों की परेशानियों जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया। दुबे ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएं जनता की समस्याओं से अलग दिखती हैं और सिर्फ दिखावे की राजनीति की जाती है। उनके अनुसार, जनता अब इन बातों को समझने लगी है और धीरे-धीरे असंतोष बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में आर्थिक स्थिति को लेकर लोगों में चिंता है। उनके मुताबिक महंगाई बढ़ रही है, रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं और आम परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे हालात में सरकार की ओर से जो संदेश दिए जाते हैं, वे वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने जैसे लगते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले 2029 के चुनावों में जनता इसका जवाब अच्छे से देगी।

कश्मीर मुद्दे पर भी उन्होंने टिप्पणी की और कहा कि भारत का रुख पाकिस्तान के प्रति सख्त होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है और रहेगा। इस विषय पर किसी भी तरह की बातचीत में देश की संप्रभुता से समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि अतीत में कई मौकों पर कठोर कदम उठाने की संभावनाएं थीं, लेकिन वे पूरी तरह लागू नहीं हो पाईं। यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण था।

राहुल गांधी के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि विपक्षी नेता जनता के मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर महंगाई, शेयर बाजार की स्थिति और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को लेकर। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करता है ताकि जनता तक अपनी बात पहुंचा सके। उनके अनुसार, राजनीतिक बहस का यह हिस्सा लोकतंत्र का सामान्य स्वरूप है।

'वंदे मातरम' के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देशभक्ति के गीत और नारे सभी भारतीयों के लिए होने चाहिए और इसमें किसी तरह का विभाजन नहीं होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में लोग अपने तरीके से राष्ट्रगीतों और देशभक्ति के भावों को स्वीकार करते हैं और यह देश की विविधता में एकता को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब अधिक जागरूक हो रही है और राजनीतिक दावों और वास्तविकता के बीच फर्क समझने लगी है। उनके अनुसार, लोग अब केवल नारों से प्रभावित नहीं होते बल्कि जमीन पर काम और परिणाम देखना चाहते हैं।


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