Top
Begin typing your search above and press return to search.

शिंदे गुट में सांसदों का आना पूरी तरह से संवैधानिक दायरे में, शिकायत दर्ज कराना विपक्ष का अधिकार: संजय निरुपम

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी

शिंदे गुट में सांसदों का आना पूरी तरह से संवैधानिक दायरे में, शिकायत दर्ज कराना विपक्ष का अधिकार: संजय निरुपम
X

मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर पूरी की गई है। पार्टी को पूरा भरोसा है कि इस मामले में सभी आवश्यक नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।

संजय निरुपम ने कहा, "मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी का कोई भी राजनीतिक अभियान अधूरा या असफल नहीं होता। शिवसेना (यूबीटी) के जो छह सांसद उनके साथ आए हैं, उनका निर्णय पूरी तरह से वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है। यदि शिवसेना (यूबीटी) के शेष सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं, तो यह उनका अधिकार है, लेकिन उनकी पार्टी को पूरा विश्वास है कि कानूनी तौर पर उनकी स्थिति मजबूत है।"

इस दौरान संजय निरुपम ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया, "लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस जनता को भ्रमित करने और दुष्प्रचार फैलाने में लगी हुई है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने भाजपा पर संविधान बदलने की मंशा रखने का आरोप लगाया था। उस समय कुछ मतदाता कांग्रेस के आरोपों से प्रभावित हुए, लेकिन अब सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बावजूद ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।"

निरुपम ने कहा, "संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है और इसे समाप्त करने या बदलने की बातें केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं। संविधान में समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। क्या कांग्रेस के शासनकाल में संविधान संशोधन नहीं किए गए थे?"

आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया और कहा, "केंद्र सरकार आरक्षण समाप्त करने की नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को अधिक अवसर देने की दिशा में काम कर रही है। परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रावधान था। इसलिए आरक्षण समाप्त करने की बात तथ्यहीन है।"

मुंबई के डिंडोशी क्षेत्र में एक टेम्पो से कथित रूप से धारदार हथियार बरामद होने की घटना पर भी निरुपम ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "मामले की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि हथियारों को किस उद्देश्य से लाया जा रहा था। यदि इसके पीछे किसी प्रकार की हिंसा या अशांति फैलाने की साजिश थी तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"

कश्मीरी पंडितों की वापसी के मुद्दे पर निरुपम ने कहा, "वर्षों पहले घाटी से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास राष्ट्रीय महत्व का विषय है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है और धीरे-धीरे कश्मीरी पंडितों की वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विस्थापित परिवारों के साथ दोबारा किसी प्रकार का अन्याय न हो।"


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it