वारिस पठान को शायना एनसी का पलटवार: दादा-परदादा भी भारत को हरा नहीं कर पाए
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के महाराष्ट्र और देश को हरे रंग में बदलने वाले बयान पर शिवसेना नेता शायना एनसी ने जोरदार पलटवार किया

शिवसेना नेता बोलीं: भगवा हमारा अस्तित्व, तुष्टिकरण की राजनीति को जनता नकारेगी
- पद्म भूषण पर विवाद: शायना एनसी ने भगत सिंह कोश्यारी के राष्ट्रवादी ट्रैक रिकॉर्ड का किया बचाव
- एकनाथ शिंदे पर बयान को लेकर गणेश नाइक पर बरसीं शायना एनसी
मुंबई। एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के महाराष्ट्र और देश को हरे रंग में बदलने वाले बयान पर शिवसेना नेता शायना एनसी ने जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनके दादा-परदादा भी इस देश को हरा नहीं कर पाए।
शायना एनसी ने कहा कि एआईएमआईएम सिर्फ इस्लामीकरण ही करता है। हरा रंग बोलना। वो भूल गए कि उनके दादा-परदादा भी इस देश को हरा नहीं कर पाए। औरंगजेब हो, अकबर हो, बाबर हो, हुमायूं हो, वो भी सक्षम नहीं हुए। ये महाराष्ट्र है, छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि जहां हिंदवी स्वराज की स्थापना हुई। आप भूलिएगा मत भगवा हमारा अस्तित्व, हमारा अभिमान है। आप तुष्टिकरण की राजनीति करते रहिए और समझ लीजिए कि जनता आपको नकारेगी। क्योंकि गए वो दिन जहां जात-पात-धर्म की राजनीति होती थी। आज है पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस और सिर्फ परफॉर्मेंस।
शिवसेना नेता शायना एनसी ने भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने पर कहा कि भगत सिंह कोश्यारी का ट्रैक रिकॉर्ड देखिए। वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे, केंद्र में मंत्री थे, उसके बाद महाराष्ट्र के गवर्नर बने और उन्होंने सिर्फ राष्ट्रवाद को बढ़ाया है, राष्ट्र प्रेम को सर्वप्रथम रखा है। जो उनको एक पद्म अवॉर्ड मिल रहा है तो इनको इतनी आपत्ति क्यों हो रही है? शायद संजय राउत हों या सुप्रिया सुले जानते हैं कि उनके पक्ष के किसी नेतागण का ये ट्रैक रिकॉर्ड नहीं रहा है कि वो पद्म भूषण के हकदार बनें। शायद इस वजह से उनको आपत्ति हो रही है। ये निर्णय जो लिया जाता है वो राष्ट्र हित में, जनता के विश्वास के साथ और उत्तराखंड के लिए एक गर्व का पल ही नहीं, एक सम्मान है, जो भगत सिंह कोश्यारी को मिल रहा है।
शायना एनसी ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के खिलाफ गणेश नाइक के बयान पर कहा कि क्या गणेश नाइक ने ऐसे बयान देने से पहले भाजपा की लीडरशिप से अनुमति ली है या यह उनकी व्यक्तिगत राय है? हमें उनके सर्टिफिकेट की कोई आवश्यकता नहीं है। एकनाथ शिंदे एक मास लीडर हैं, एक ग्राउंड लीडर हैं। उन पर जनता का विश्वास है। जब आप इस तरह के बयान देते हैं, तो आपकी मानसिकता साफ दिखाई देती है। गणेश नाइक यह मत भूलिए कि आपको मंत्री पद का मौका तब मिला था, जब इस महाराष्ट्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे थे।
दावोस का जिक्र करते हुए शायना एनसी ने कहा कि दावोस में अपरंपार इतिहास बना है, क्योंकि 3,00,000 करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए हैं, जिससे महाराष्ट्र में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट आएगा। यह अपने आप में ऐतिहासिक है। विपक्ष को आपत्ति इसलिए हो रही है, क्योंकि उन्हें पता है कि महाराष्ट्र सबसे आगे है। कन्वर्जन रेट के हिसाब से 55 से 65 प्रतिशत एमओयू वास्तविक रूप से लागू होंगे। इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे, मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। आपको यह देखना चाहिए कि अर्थव्यवस्था किस तरह एक विकसित भारत और एक विकसित महाराष्ट्र की ओर बढ़ रही है।


