Top
Begin typing your search above and press return to search.

शरद पवार ने अजित पवार की एनसीपी के विलय और सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने के सवाल पर तोड़ी चुप्पी

इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने बारामती में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर उनसे कोई चर्चा नहीं हुई है।

शरद पवार ने अजित पवार की एनसीपी के विलय और सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने के सवाल पर तोड़ी चुप्पी
X
मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार के असामयिक निधन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हो गया है। उनके निधन के साथ ही सत्ता संतुलन, पार्टी नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सबसे अधिक चर्चा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर हो रही है।

इसी बीच एनसीपी विधायकों की बैठक 31 जनवरी को दोपहर दो बजे बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में विधायक दल का नेता चुना जा सकता है और उसके तुरंत बाद शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित हो सकता है।

सुनेत्रा पवार के नाम पर चर्चा

अजित पवार के मुंबई स्थित आवास पर सुनेत्रा पवार के पहुंचने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। पार्टी के भीतर और बाहर से यह मांग उठ रही है कि उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाए। वरिष्ठ एनसीपी नेता और विधायक छगन भुजबल ने कहा कि मीडिया और कई कार्यकर्ताओं की ओर से यह मांग सामने आई है कि यह पद सुनेत्रा ताई को दिया जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस मांग में कोई असंगति नहीं दिखती, लेकिन अंतिम निर्णय विधायक दल की बैठक में ही लिया जाएगा। एनसीपी सांसद सुनील तटकरे ने भी संकेत दिया कि विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री को पत्र सौंपा जाएगा, जिसके बाद शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

शरद पवार का रुख: ‘कोई प्रस्ताव नहीं’

इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने बारामती में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर उनसे कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और न ही कोई अनुरोध किया गया है। यह उनकी पार्टी का फैसला हो सकता है, लेकिन मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या अजित पवार की अनुपस्थिति में एनसीपी के फैसले अब भाजपा ले रही है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

दोनों गुटों के विलय पर ठहराव

शरद पवार ने दोनों राष्ट्रवादी गुटों के संभावित विलय पर भी बात की। उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों से दोनों गुटों के बीच सकारात्मक बातचीत चल रही थी। अजित पवार और जयंत पाटिल इस प्रक्रिया में सक्रिय थे और 12 तारीख को किसी बड़े फैसले की घोषणा की योजना थी। उन्होंने कहा, “अजित की इच्छा थी कि दोनों राष्ट्रवादी गुट एक साथ आएं और मेरी भी यही इच्छा है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रक्रिया में एक तरह का ठहराव दिखाई दे रहा है। शरद पवार ने स्पष्ट किया कि विलय की चर्चाओं का भाजपा में शामिल होने से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने सुप्रिया सुले और रोहित पवार को मंत्री पद दिए जाने की अटकलों को भी निराधार बताया।

‘एनसीपी का आंतरिक मामला’

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से जब सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे एनसीपी का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने कहा कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह एनसीपी का होगा और भाजपा सरकार उनके हर फैसले के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे मामला अजित पवार के परिवार का हो या पार्टी का, सरकार पूरी तरह समर्थन देगी।

पार्टी के भीतर मंथन जारी

वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि इस संवेदनशील समय में जल्द निर्णय लेना जरूरी है, लेकिन पार्टी अभी राजनीतिक शोक की स्थिति में है। उन्होंने बताया कि सुनेत्रा पवार के नाम पर औपचारिक चर्चा अभी नहीं हुई है। पटेल ने कहा कि इस विषय पर परिवार के अन्य सदस्यों पार्थ पवार और जय पवार से भी चर्चा करनी होगी। उन्होंने संकेत दिया कि भावनात्मक पहलू भी महत्वपूर्ण है और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

शरद पवार गुट के नेता राजेश टोपे ने भी कहा कि पवार परिवार को एक साथ बैठकर शरद पवार के अनुभव का उपयोग करते हुए सही फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व, मंत्री पदों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर संतुलित निर्णय जरूरी है।

आगे क्या?

31 जनवरी की विधायक दल की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में न केवल विधायक दल का नेता चुना जाएगा, बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि पार्टी नेतृत्व किस दिशा में आगे बढ़ेगा। अजित पवार के निधन से जहां एक ओर राजनीतिक शोक की स्थिति है, वहीं दूसरी ओर सत्ता और संगठनात्मक संतुलन को लेकर तेजी से मंथन जारी है। सुनेत्रा पवार के नाम पर सहानुभूति और समर्थन की लहर दिख रही है, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी की सामूहिक सहमति से ही होगा।

महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जहां न केवल नेतृत्व का सवाल है, बल्कि एनसीपी के दोनों गुटों के भविष्य और राज्य की सत्ता संरचना पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it