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पीओके हिंसा के मुद्दे पर संजय निरुपम बोले, अब सख्त रुख अपनाने का समय

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पीओके में पाकिस्तानी सेना द्वारा फायरिंग और बमबारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिसमें लगभग 16 लोगों की मौत की सूचना है।

पीओके हिंसा के मुद्दे पर संजय निरुपम बोले, अब सख्त रुख अपनाने का समय
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मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हिंसा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पीओके में पाकिस्तानी सेना द्वारा फायरिंग और बमबारी की खबरें सामने आ रही हैं, जिसमें लगभग 16 लोगों की मौत की सूचना है।

उन्होंने कहा कि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है। समय आ गया है कि भारत को इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहिए ताकि पीओके को भारत में पुनः शामिल किया जा सके और वहां के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि भारत का जनमानस भी चाहता है कि पीओके के नागरिक सुरक्षित रहें और क्षेत्र में स्थिरता स्थापित हो।

संजय निरुपम ने कहा कि हाल ही में नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति पर महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं विभिन्न संकटों का सामना कर रही हैं, तब भारत स्थिरता और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, भारत की आर्थिक विकास दर पहले 6.6 प्रतिशत के आसपास थी, जिसे अब बढ़ाकर आने वाले वर्षों में लगभग 7.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बहुत कम समय में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

उन्होंने कहा कि महंगाई और रोजगार जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और सरकार आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सफल रही है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में गंभीर संकट की स्थिति है और कई नेता संगठन से दूरी बना रहे हैं। पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं और इससे संगठनात्मक अस्थिरता और बढ़ रही है।


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