RSS-CJP के बीच बढ़ा टकराव: जंतर-मंतर आंदोलन पर 'राष्ट्रविरोधी' टिप्पणी के बाद अभिजीत दिपके का पलटवार
30 जुलाई को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतुल लिमये ने युवाओं से जंतर-मंतर आंदोलन का राजनीतिक और वैचारिक विश्लेषण करने की अपील की।

मुंबई: नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और सीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। आरएसएस के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये द्वारा आंदोलन को कथित रूप से "राष्ट्रविरोधी" और "संविधान विरोधी" तत्वों से प्रभावित बताए जाने के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संघ पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन को राष्ट्रविरोधी करार देने का आरएसएस को कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
अतुल लिमये ने आंदोलन के स्वरूप पर उठाए सवाल
30 जुलाई को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतुल लिमये ने युवाओं से जंतर-मंतर आंदोलन का राजनीतिक और वैचारिक विश्लेषण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शुरुआत में नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर छात्रों का आक्रोश वास्तविक था, लेकिन बाद में आंदोलन की दिशा बदल गई और कथित रूप से ऐसे समूह सक्रिय हो गए जिनका उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करना था। लिमये ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक छात्र आंदोलन के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में भी समझने की आवश्यकता है।
ग्राम्शी के सिद्धांतों का किया उल्लेख
अपने संबोधन में लिमये ने इटली के मार्क्सवादी चिंतक एंटोनियो ग्राम्शी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ संगठन लोकतांत्रिक व्यवस्था को भीतर से कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, न्यायपालिका, नौकरशाही और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास कम करना ऐसी सोच का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान ऐसे लोग भी मंच से जुड़े दिखाई दिए, जिन पर पहले राष्ट्रविरोधी नारे लगाने के आरोप लग चुके हैं।
व्यवहार और भाषा पर भी जताई आपत्ति
अतुल लिमये ने आंदोलन में शामिल कुछ छात्र-छात्राओं के व्यवहार, भाषा और पहनावे पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सार्वजनिक आंदोलनों में शालीनता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का पालन होना चाहिए। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध "ग्रामर ऑफ एनार्की" भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अराजक प्रवृत्तियों से बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
अभिजीत दीपके का तीखा जवाब
सोमवार को सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरएसएस की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चला आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था। उन्होंने कहा कि आंदोलन का एकमात्र उद्देश्य नीट-यूजी पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना था और इसे किसी राजनीतिक या राष्ट्रविरोधी गतिविधि से जोड़ना अनुचित है। दीपके ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि संगठन को लोकतांत्रिक आंदोलनों पर सवाल उठाने से पहले अपने इतिहास पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी की हत्या और संघ पर अतीत में लगे प्रतिबंधों का भी उल्लेख करते हुए तीखी राजनीतिक टिप्पणी की।
आंदोलन के उद्देश्य का किया बचाव
सीजेपी प्रमुख ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चला आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहा और उसमें छात्रों की आवाज को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया गया। उनके अनुसार, आंदोलन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय कराना और नीट-यूजी पेपर लीक मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करना था। दीपके ने यह भी कहा कि आंदोलन ने अपने प्रमुख लक्ष्य हासिल किए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इसे समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
बयानों से बढ़ी राजनीतिक बहस
आरएसएस और सीजेपी के बीच सामने आए इन बयानों के बाद छात्र आंदोलनों, लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक संगठनों की भूमिका पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आरएसएस आंदोलन के पीछे वैचारिक और राजनीतिक प्रभावों की बात कर रहा है, वहीं सीजेपी इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे छात्रों के हित में चला शांतिपूर्ण अभियान बता रही है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।


