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राज ठाकरे का हमला- ‘परिसीमन से सत्ता पर स्थायी कब्जा जमाना चाहती है सरकार’

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह संवैधानिक संशोधनों का इस्तेमाल 'सत्ता पर हमेशा के लिए कब्जा जमाने' के एक हथियार के तौर पर कर रही है।

राज ठाकरे का हमला- ‘परिसीमन से सत्ता पर स्थायी कब्जा जमाना चाहती है सरकार’
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‘महिला आरक्षण का विरोध नहीं, लेकिन जल्दबाजी पर सवाल’: मनसे प्रमुख का बयान

  • ‘जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान, बढ़ती जनसंख्या वाले राज्यों को फायदा’
  • राज ठाकरे बोले- ‘परिसीमन हिंदी थोपने की शुरुआत, वोट बैंक राजनीति का खतरा’
  • ‘महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की आवाज कमजोर होगी’: टैक्स और प्रतिनिधित्व पर चेतावनी

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह संवैधानिक संशोधनों का इस्तेमाल 'सत्ता पर हमेशा के लिए कब्जा जमाने' के एक हथियार के तौर पर कर रही है।

ठाकरे ने दो पन्नों के एक बयान में साफ किया कि मनसे महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं करती है। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि महिलाओं के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण लागू करने में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा है।

हालांकि, उन्होंने इस कानून को लागू करने के समय और इसमें दिखाई गई 'अचानक की जल्दबाजी' पर तीखे सवाल उठाए, जबकि इस पर चर्चा अभी भी जारी थी।

मनसे प्रमुख ने जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन पर भी आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 का असर यह होगा कि महाराष्ट्र, गोवा और दक्षिण भारत के उन राज्यों को नुकसान उठाना पड़ेगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है।

ठाकरे ने कहा, "जिन राज्यों ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए अपनी जनसंख्या को पूरी लगन से नियंत्रण में रखा है, उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ेगा, जबकि जिन राज्यों ने अपनी जनसंख्या को बेरोकटोक बढ़ने दिया, उनका संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ जाएगा।"

उन्होंने सवाल उठाया कि यह किस तरह का अजीबोगरीब न्याय है?

राज ठाकरे ने यह आरोप भी लगाया कि सीटों का यह पुनर्गठन, हिंदी न बोलने वाले राज्यों पर जबरदस्ती 'हिंदी थोपने' की शुरुआत है। उन्होंने तीन-चार उत्तरी राज्यों से होने वाले पलायन को लेकर बढ़ती चिंता को भी उजागर किया। उनका दावा है कि इन राज्यों से आने वाले लोग महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में अपने 'वोट बैंक' तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि इन क्षेत्रों से चुनकर आए प्रतिनिधियों की अपने अपनाए हुए राज्यों के प्रति कोई सच्ची निष्ठा नहीं होती। इसके बजाय वे अपने मूल क्षेत्रों पर ही ज्‍यादा ध्यान देते हैं। उनका मानना ​​है कि यह चलन धीरे-धीरे पूरे दक्षिण भारत में फैल जाएगा।

मनसे प्रमुख ने उन राज्यों के बीच बढ़ती आर्थिक खाई का भी जिक्र किया, जो केंद्र सरकार को टैक्स के रूप में ज्‍यादा योगदान देते हैं, और उन राज्यों के बीच, जिन्हें केंद्र से आर्थिक सहायता मिलती है। उन्होंने टैक्स से होने वाली आय के बंटवारे का एक तुलनात्मक ब्योरा भी पेश किया।

राज ठाकरे ने कहा, "हमें न सिर्फ टैक्स से होने वाली आय में हमारा जायज हिस्सा नहीं मिलेगा, बल्कि अब महाराष्ट्र और गोवा समेत दक्षिण भारत के सभी पांचों राज्यों की संसद में सामूहिक आवाज भी कमजोर पड़ जाएगी।"

उन्होंने इस स्थिति को 'बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने लायक' बताया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पिछले एक दशक के दौरान विधायकों को अपने पाले में करने और राजनीतिक परिवारों के भीतर फूट डालने का आरोप लगाते हुए मनसे प्रमुख ने चेतावनी दी कि परिसीमन के जरिए 'देश को बदलने' की इस कोशिश के बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इन उपायों से विभिन्न राज्यों में स्वायत्तता की मांगें उठ सकती हैं, और इससे देश की आंतरिक सुरक्षा और रक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

उन्होंने गुजरात जैसे राज्यों के नेताओं से आग्रह किया कि वे निश्चिंत न रहें, और चेतावनी दी कि कोई भी हमेशा के लिए खाइयों में सुरक्षित नहीं रह सकता।


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