Top
Begin typing your search above and press return to search.

राहुल गांधी छात्रों से मिल सकते हैं, लेकिन भीड़ जुटाकर पीआर करने से लाभ नहीं: संजय निरुपम

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित पुणे दौरे, राजस्थान के रामपुरा-कंवरपुरा में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर हुए विवाद और पैलेट गन से चोट के कथित मामले पर प्रतिक्रिया दी

राहुल गांधी छात्रों से मिल सकते हैं, लेकिन भीड़ जुटाकर पीआर करने से लाभ नहीं: संजय निरुपम
X

मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित पुणे दौरे, राजस्थान के रामपुरा-कंवरपुरा में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर हुए विवाद और पैलेट गन से चोट के कथित मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी के पुणे में आयोजित होने वाले छात्र कार्यक्रम को लेकर कथित राजनीतिक भीड़ जुटाने का आरोप लगाया और सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए राजनीतिक गतिविधियों के बजाय व्यवस्थित प्रयासों की जरूरत बताई। वहीं, पैलेट गन मामले में उन्होंने पुलिस से कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच करने की बात कही।

राहुल गांधी के प्रस्तावित पुणे दौरे को लेकर संजय निरुपम ने कहा कि राहुल गांधी समेत देश का कोई भी नेता किसी भी शहर में जाकर आम लोगों, युवाओं और छात्रों से संवाद कर सकता है। लेकिन, किसी भी संवाद की सार्थकता तभी होगी जब लोग अपनी इच्छा से नेता को सुनने के लिए आएं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुणे क्षेत्र में कांग्रेस से जुड़े स्कूल-कॉलेजों से छात्रों को कार्यक्रम में भेजने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, उन्होंने सोशल मीडिया पर कार्यक्रम को बड़ा दिखाने के लिए इन्फ्लुएंसर्स को कथित तौर पर पैसे देकर प्रचार कराने का आरोप भी लगाया। इस तरह के पीआर आधारित कार्यक्रम से राहुल गांधी को बड़ा मंच जरूर मिल सकता है, लेकिन इसका कांग्रेस को राजनीतिक लाभ मिलेगा, ऐसा उन्हें नहीं लगता।

जयपुर के बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सीजेपी की टीम के सरकारी स्कूल पहुंचने और ग्रामीणों द्वारा कथित विरोध किए जाने के मामले पर भी निरुपम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली की जांच करना गलत नहीं है और ऐसा काम किया जाना चाहिए। किसी स्कूल या गांव में जाने से पहले स्थानीय ग्रामीणों, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों या छात्रों से संवाद और अनुमति की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। यदि कोई संगठन बिना स्थानीय लोगों से बातचीत किए किसी गांव या स्कूल में अचानक पहुंचता है और इसे राजनीतिक गतिविधि के रूप में देखा जाता है, तो विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने रामपुरा-कंवरपुरा की घटना को सीजेपी के लिए सीख बताते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया कंटेंट बनाने या राजनीतिक प्रचार के लिए नाटकीय अंदाज में स्कूलों का दौरा करने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं आएगा।

उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर कहा कि देश के कई राज्यों में स्कूलों के रखरखाव, बुनियादी ढांचे और कामकाज से जुड़ी कमियां हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए सरकारों को संस्थागत स्तर पर काम करना चाहिए और सामाजिक व निजी स्तर पर भी सहयोग किया जा सकता है।

राहुल गांधी द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन से घायल छात्र को लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचने पर भी संजय निरुपम ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने संबंधित वीडियो देखा है, जिसमें राहुल गांधी एक युवक को लेकर पुलिस थाने पहुंचे। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित युवक जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में शामिल था या नहीं और उसकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि है या नहीं। इस मामले में तथ्यों की जांच जरूरी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए राहुल गांधी को पुलिस को मामले की जानकारी देनी चाहिए और शिकायत की निष्पक्ष जांच का आग्रह करना चाहिए। पुलिस शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कर सकती है और यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज की जा सकती है।

निरुपम ने कहा कि बिना जांच के तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग करना उचित नहीं है। पहले शिकायत की जांच और तथ्यों की पुष्टि होनी चाहिए, उसके बाद कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। इस तरह की राजनीति से राहुल गांधी की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है और कांग्रेस के प्रति लोगों की धारणा भी कमजोर हो सकती है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it