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भगवान राम के नाम पर राजनीति और धन का दुरुपयोग हो रहा: आनंद दुबे

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने राम मंदिर के लिए मिली दान राशि के कथित दुरुपयोग और प्रबंधन को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा

भगवान राम के नाम पर राजनीति और धन का दुरुपयोग हो रहा: आनंद दुबे
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मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने राम मंदिर के लिए मिली दान राशि के कथित दुरुपयोग और प्रबंधन को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई भगवान राम के नाम पर विश्वास के साथ दान करते हैं कि यह धन समाज कल्याण और जनसेवा के कार्यों में लगाया जाएगा, लेकिन इसके उलट धन के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं।

आनंद दुबे ने सोमवार को कहा कि महाकुंभ 2025 के दौरान और उसके बाद देशभर से श्रद्धालुओं ने भगवान राम के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए करोड़ों रुपए का दान दिया। आम लोग यह सोचकर योगदान करते हैं कि इस धन का उपयोग अस्पताल बनाने, स्कूल खोलने, गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने और समाज के वंचित वर्गों की सहायता करने जैसे कार्यों में होगा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में दान राशि के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े धन के गलत प्रबंधन और कथित दुरुपयोग की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इस मामले में जवाबदेही तय होती नहीं दिख रही। दुबे ने कहा कि जब सवाल उठाए जा रहे हैं तब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।

जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर आरोप लग रहे हैं और जो जांच एजेंसियों से जुड़े हैं, दोनों का संबंध सत्ता पक्ष से होने के कारण निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि यही मामला किसी गैर-भाजपा सरकार के कार्यकाल में सामने आया होता तो अब तक संबंधित लोग गिरफ्तार हो चुके होते। सरकार की नाक के नीचे इतना बड़ा कथित घोटाला सामने आने के बावजूद जवाबदेही तय नहीं हो रही है। भगवान राम के नाम पर राजनीति की जा रही है और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वहीं, महाराष्ट्र की राजनीति में कथित ऑपरेशन टाइगर, ऑपरेशन लोटस और दलबदल की चर्चाओं पर भी आनंद दुबे ने अपनी पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिवसेना (यूबीटी) किसी भी प्रकार की राजनीतिक तोड़फोड़, भ्रष्टाचार या सत्ता के लिए किए जाने वाले अभियानों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि पार्टी का एकमात्र उद्देश्य जनता की सेवा करना है और वह इसी रास्ते पर आगे बढ़ रही है।

2022 में शिवसेना में हुई टूट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उनकी पार्टी को नया नाम और नया चुनाव चिह्न अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी ने हार नहीं मानी और जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए रखी। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में तमाम चुनौतियों के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) नौ सांसदों को संसद भेजने में सफल रही।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेता यह अच्छी तरह जानते हैं कि जनता का झुकाव किस ओर है। दुबे ने कहा कि यदि सत्ता पक्ष अपनी राजनीतिक ताकत का परीक्षण करना चाहता है तो उसे ऐसा करने का पूरा अधिकार है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) जनता के बीच जाकर अपना संदेश पहुंचाती रहेगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई लड़ती रहेगी।


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