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दूसरे राज्यों से पलायन के लिए विपक्ष जिम्मेदार, अमित ठाकरे की धमकी का समर्थन नहीं: प्रताप सरनाईक

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने उत्तर भारत से महाराष्ट्र की ओर होने वाले पलायन, अमित ठाकरे की धमकी, 'ऑपरेशन टाइगर', गरबा में मुस्लिमों की एंट्री और ठाकरे परिवार की राजनीतिक स्थिति समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

दूसरे राज्यों से पलायन के लिए विपक्ष जिम्मेदार, अमित ठाकरे की धमकी का समर्थन नहीं: प्रताप सरनाईक
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मुंबई। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने उत्तर भारत से महाराष्ट्र की ओर होने वाले पलायन, अमित ठाकरे की धमकी, 'ऑपरेशन टाइगर', गरबा में मुस्लिमों की एंट्री और ठाकरे परिवार की राजनीतिक स्थिति समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने को पलायन की एक बड़ी वजह बताया और इसके लिए वहां की पिछली सरकारों और राजनीतिक नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।

प्रताप सरनाईक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि मुंबई समेत महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आकर ऑटो और टैक्सी चलाने समेत विभिन्न काम करते हैं। इनमें बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों की है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन राज्यों में सत्ता में रहे नेताओं ने अपने यहां पर्याप्त रोजगार के अवसर क्यों नहीं बनाए। सरनाईक ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक कांग्रेस और गांधी परिवार के नेताओं के सत्ता में रहने के बावजूद उत्तर प्रदेश और बिहार में रोजगार की समस्या बनी रही। उन्होंने पूर्व समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों पर भी पलायन रोकने के लिए पर्याप्त काम नहीं करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए लोग मुंबई और महाराष्ट्र जैसे शहरों का रुख करते हैं। उन्होंने भाजपा पर नरमी बरतते हुए कहा कि पिछले 15-20 वर्षों में उत्तर भारत के राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारें आने के बाद मुंबई की ओर पलायन में कमी आई है, लेकिन यह पूरी तरह रुका नहीं है। भाजपा और सहयोगी दलों के काम की सराहना करते हुए उन्होंने पहले की कांग्रेस, सपा और बसपा सरकारों को पलायन के लिए जिम्मेदार ठहराया।

अमित ठाकरे की ओर से धमकी दिए जाने पर सरनाईक ने कहा कि वह इस तरह की धमकी का समर्थन नहीं करते। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह है, लेकिन किसी को मारने-पीटने की बात करना गलत है और ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए। जिन मुद्दों को बातचीत और सामाजिक तरीके से सुलझाया जा सकता है, उनके लिए विवाद या आक्रामक बयानबाजी की जरूरत नहीं है।

शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में आने की चर्चाओं के बीच सरनाईक ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे गुट के कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतकर आए कुछ सांसदों और विधायकों को अब अपनी राजनीतिक गलती का अहसास हो रहा है और वे शिंदे के साथ आ रहे हैं। 'ऑपरेशन टाइगर' को किसी तय संख्या या औपचारिक अभियान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना जिन विचारों के आधार पर की थी, उनमें हिंदुत्व भी महत्वपूर्ण था, जिससे 2019 में कांग्रेस के साथ जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने उस विचारधारा से दूरी बना ली।

सरनाईक ने कहा कि कितने विधायक संपर्क में हैं और वे कब शिवसेना में आएंगे, इसकी संख्या या समय बताना अभी उचित नहीं होगा, लेकिन संपर्क में होने की बात उन्होंने सच बताई।

उन्होंने ठाकरे परिवार के राजनीतिक भविष्य पर कहा कि किसी पार्टी या नेता की राजनीति अचानक खत्म नहीं होती। राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की राजनीति पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के 2019 के राजनीतिक फैसलों के बाद उनकी राजनीति का दायरा सीमित हुआ है।

गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिमों के प्रवेश और बुर्के पर प्रतिबंध को लेकर दिए गए बयानों पर सरनाईक ने मंत्री नितेश राणे से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान कई बार प्रचार पाने के लिए दिए जाते हैं। वह बड़े स्तर पर दही हांडी और गणपति उत्सव आयोजित करते हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं और उन्हें इसमें कोई परेशानी नहीं होती। त्योहारों में लोगों की भागीदारी को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस कथन का भी समर्थन किया, जिसमें मुस्लिमों के प्रति प्रेम और सद्भाव को हिंदू मूल्यों से जोड़ा गया था।


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