‘ऑपरेशन टाइगर’ का धमाका! उद्धव गुट में बगावत की आहट
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने की आहट है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के 9 सांसदों में से 6 सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और बुधवार (17 जून) को लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं

दिल्ली में सियासी तूफ़ान! शिंदे गुट की गुप्त चालें
- स्थापना दिवस से पहले बड़ा झटका? उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ीं
- 6 सांसदों की बगावत! शिवसेना (UBT) में भूचाल
- शिंदे का कद और मजबूत! एनडीए में तीसरे बड़े सहयोगी बनने की तैयारी
महाराष्ट्र। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने की आहट है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के 9 सांसदों में से 6 सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और बुधवार (17 जून) को लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं। यह घटनाक्रम शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस (19 जून) से ठीक पहले हो रहा है, जिससे उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लग सकता है।
दिल्ली में सियासी हलचल
- एकनाथ शिंदे मंगलवार रात चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली पहुंचे।
- उनके बेटे श्रीकांत शिंदे भी लीगल टीम के साथ राजधानी में मौजूद हैं।
- बैठक में तय होगा कि स्पीकर से संपर्क और आगे की कानूनी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी।
बागियों के नाम चर्चा में
सूत्रों के अनुसार, जिन सांसदों के शिंदे गुट से जुड़ने की अटकलें हैं, उनमें शामिल हैं:
- संजय देशमुख (यवतमाल)
- भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी)
- संजय जाधव (परभणी)
- राजाभाऊ वाजे (नाशिक)
- नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)
- ओमराजे निंबालकर (उस्मानाबाद)
हालांकि, इन नामों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
उद्धव गुट का दावा
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने पार्टी में किसी भी तरह की टूट से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि सभी सांसद एकजुट हैं और रहेंगे। रविवार को उद्धव ठाकरे की बैठक में केवल चार सांसद व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए थे, जबकि बाकी ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई।
शिंदे गुट का रुख
शिंदे समर्थक नेताओं का कहना है कि पार्टी के दरवाजे उन सभी के लिए खुले हैं जो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विश्वास रखते हैं। यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात की, जिससे अटकलें और तेज हो गईं।
स्थापना दिवस से पहले बड़ा झटका?
अगर 6 सांसद उद्धव गुट छोड़ते हैं, तो यह शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से पहले एकनाथ शिंदे के लिए बड़ी राजनीतिक जीत होगी। इससे एनडीए में शिंदे का कद और मजबूत होगा और उनकी पार्टी भाजपा की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी बन सकती है।


