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एनटीए को यूपीएससी से सीख लेने की जरूरत, संजय निरुपम ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का किया समर्थन

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर चिंता जताई। संजय निरुपम ने कहा कि नीट परीक्षा से जुड़े पेपर लीक का मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि इससे देश के लाखों छात्रों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है

एनटीए को यूपीएससी से सीख लेने की जरूरत, संजय निरुपम ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का किया समर्थन
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मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने शनिवार को नीट पेपर लीक मामले को लेकर चिंता जताई। संजय निरुपम ने कहा कि नीट परीक्षा से जुड़े पेपर लीक का मामला बेहद गंभीर है, क्योंकि इससे देश के लाखों छात्रों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है। इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन होना चाहिए और एनटीए को यूपीएससी से सीख लेनी चाहिए ताकि इस तरह की घटना दोबारा न हो।

उन्होंने कहा कि करीब 22 लाख छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और अगर परीक्षा की गोपनीयता ही भंग हो जाए तो मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय होता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का स्वागत किया जिसमें कहा गया कि पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

निरुपम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूपीएससी कई दशकों से देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं का आयोजन कर रही है और आज तक उसके पेपर लीक होने की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई। उनका कहना है कि नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी उसी तरह की पारदर्शिता और सख्ती होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी राज्य में रह रहे हैं और अब उन्हें चिन्हित कर वापस भेजने की दिशा में जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे स्वागत योग्य हैं। उनके मुताबिक "डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट" की नीति के तहत अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा रही है और उनके लिए अलग-अलग होल्डिंग सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं, उन्हें अंततः अपने देश वापस जाना चाहिए।

केरल विधानसभा में वंदे मातरम विवाद पर संजय निरुपम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा के सत्र की शुरुआत में वंदे मातरम का पूरा गायन नहीं कराया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है। इसे पूरा गाया जाना चाहिए था और ऐसा न होना स्वतंत्रता सेनानियों और देश के शहीदों के सम्मान के खिलाफ है। इस मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

निरुपम ने कहा कि वंदे मातरम को देश में विशेष सम्मान प्राप्त है और सरकारी कार्यक्रमों में इसके गायन की एक परंपरा रही है। उनका मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीतों को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए और उनका सम्मान सभी को करना चाहिए।

उन्होंने महाराष्ट्र के डेयरी ब्रांड गोकुल के दूध, दही और मक्खन से जुड़े हलाल सर्टिफिकेशन विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। संजय निरुपम ने कहा कि मांसाहारी उत्पादों के लिए हलाल प्रमाणन को एक अलग विषय माना जा सकता है, लेकिन शाकाहारी उत्पादों पर भी इसी तरह के प्रमाणपत्र की अनिवार्यता सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्यात के नाम पर उत्पादकों पर अतिरिक्त दबाव डाला जाता है और इससे एक बड़ा आर्थिक तंत्र विकसित हो गया है।

निरुपम का कहना है कि दूध, दही, मक्खन जैसे उत्पादों का हलाल सर्टिफिकेशन कई लोगों के लिए समझ से परे है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और स्पष्ट नीति बनाने की मांग की ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद पैदा न हों। उनके अनुसार, देश में निर्यात और प्रमाणन की प्रक्रिया पारदर्शी और समान होनी चाहिए, जिससे किसी भी तरह की भ्रम या विवाद की स्थिति न बने।


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