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मनोज जरांगे की सरकार को चेतावनी, ईंधन बचाओ की अपील मानेंगे, लेकिन पहले हमारी मांगें मानो

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार को केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी

मनोज जरांगे की सरकार को चेतावनी, ईंधन बचाओ की अपील मानेंगे, लेकिन पहले हमारी मांगें मानो
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मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार को केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईंधन बचत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का समर्थन करेंगे, लेकिन सरकार को पहले मराठा समाज की लंबित मांगों को पूरा करना होगा। अन्यथा आंदोलन पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलेगा और मराठी लोग तूफान की तरह सड़कों पर उतरेंगे।

मनोज जरांगे ने कहा, "हमारा आंदोलन पूर्वनियोजित है और वह होकर रहेगा। आपके मंत्री पहले से तय दौरे पर हवाई जहाज से गए, तो वह सही है, और हमारा आंदोलन गलत है, ऐसा नहीं चलेगा। अब देखना, मराठी लोग तूफान की तरह निकलेंगे, क्योंकि यह हमारे बच्चों के भविष्य का सवाल है। हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद मत करो। हमारी मांगें मान लो।"

जरांगे ने ईंधन बचत की अपील पर सीधे जवाब देते हुए कहा, "ईंधन की बचत तो होगी, तो आप हमारी मांगें मान लो, बचत हो गई, लेकिन क्या हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद होने देना है? आपको सरकार की चिंता है, लेकिन गरीब मराठा समाज की परेशानी की जानकारी नहीं है।"

उन्होंने खेती के मौसम का हवाला देते हुए कहा कि इस समय किसानों को बीज, खाद और फवारणी के लिए डीजल की जरूरत होती है। ट्रैक्टर चलाने पड़ते हैं। ऐसे में ईंधन बचाओ का आह्वान किसानों को संकट में डाल देगा।

जरांगे ने आगे कहा, "ऐसे समय में सरकार को उल्टा यह भरोसा देना चाहिए कि हम ईंधन की कमी नहीं होने देंगे। प्रधानमंत्री को इस भूमिका में आना चाहिए। किसानों ने उन पर बहुत विश्वास किया है। गरीबों और किसानों ने पीएम मोदी का साथ दिया है। हर बार हमने उनके आह्वान का साथ दिया है, लेकिन जनता की मांगें भी पूरी होनी चाहिए।"

मराठा आरक्षण को लेकर उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि शिंदे समिति की सिफारिशें लागू नहीं की जा रही हैं, केस वापस नहीं लिए जा रहे हैं, विद्यार्थियों की सारथी योजना बंद कर दी गई है और हैदराबाद गजट का जीआर निकालकर प्रमाणपत्र भी नहीं बांटे जा रहे हैं।

मनोज जरांगे ने साफ कहा, "आपके आह्वान का समर्थन देने के लिए हम तैयार हैं, लेकिन हमारी मांगों को लागू करो। अगर आपने हमारी मांगें नहीं मानीं, तो छुट्टी नहीं होगी। जब बच्चों का भविष्य दांव पर लगता है, तब मराठी लोग घर में सोते नहीं हैं, बल्कि कड़ी धूप और बारिश में भी निकल पड़ते हैं।"

उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत मराठा विद्यार्थियों की एडमिशन प्रक्रिया को सुगम बनाए और आरक्षण संबंधी सभी वादे पूरे करे।


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