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महाराष्ट्र: कोंकण में आम और काजू किसानों को मुआवजा पैकेज को लेकर विधायकों ने कृषि मंत्री को घेरा

महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब विधायकों ने कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को कोंकण क्षेत्र के आम और काजू किसानों के लिए घोषित आर्थिक मुआवजा पैकेज को बेहद कम बताकर घेर लिया

महाराष्ट्र: कोंकण में आम और काजू किसानों को मुआवजा पैकेज को लेकर विधायकों ने कृषि मंत्री को घेरा
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मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब विधायकों ने कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को कोंकण क्षेत्र के आम और काजू किसानों के लिए घोषित आर्थिक मुआवजा पैकेज को बेहद कम बताकर घेर लिया। इन किसानों की फसलें बेमौसम बारिश और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हुई थीं।

सत्र के दौरान माहौल गर्म हो गया, जब विधायकों ने प्रस्तावित मुआवजा राशि को बहुत कम बताया और प्रशासन पर कोंकण के किसानों की समस्या को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

विवाद तब बढ़ गया जब शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक निलेश राणे ने विधानसभा में कृषि मंत्री की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “क्या आप हमें कुछ भी बता देंगे और हम चुपचाप सुनते रहेंगे? क्या आप किसानों को प्रति हेक्टेयर बहुत कम राशि देकर उन्हें धोखा दे रहे हैं?”

उन्होंने आम किसानों के लिए 1,70,000 रुपए प्रति हेक्टेयर और काजू किसानों के लिए 1,20,000 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग की।

यह विवाद राज्य की उस योजना के बाद शुरू हुआ, जिसमें कोकण क्षेत्र के लिए कुल 209 करोड़ रुपए का एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष) पैकेज देने का प्रस्ताव रखा गया था।

निलेश राणे ने इस राशि के गणित पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े प्रभावित किसानों में इसे बांटने पर प्रत्येक किसान को बहुत ही कम राशि मिलेगी, जो अपमानजनक है। उन्होंने औपचारिक रूप से आम के लिए 1,70,000 रुपए और काजू के लिए 1,20,000 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग दोहराई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नकली कीटनाशकों ने फसल नुकसान को और बढ़ा दिया है।

इस पर कृषि मंत्री ने जवाब दिया कि कृषि विभाग और बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार फसल नुकसान का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और अनियमित मौसम है।

हालांकि, निलेश राणे ने इस रिपोर्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सर्वे कब, कहां और किन अधिकारियों ने किया, और कहा कि दस्तावेज विधानसभा सत्र के करीब आने पर ही सामने लाए गए हैं।

एनडीआरएफ नियमों के अनुसार प्रभावित किसानों को 22,500 रुपए प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।

मंत्री ने बताया कि सरकार ने कोंकण क्षेत्र के किसानों के लिए 209 करोड़ रुपए की राहत योजना भेजी है। जिलावार सहायता में रत्नागिरी को 98.45 करोड़ रुपए (52,628 किसान), सिंधुदुर्ग को 79.05 करोड़ रुपए (42,322 किसान), रायगढ़ को लगभग 20.28 करोड़ रुपए (17,000 किसान), पालघर को 6.83 करोड़ रुपए (17,712 किसान) और ठाणे को 4.84 करोड़ रुपए (4,669 किसान) शामिल हैं।

इसके अलावा, आम और काजू किसानों को मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत लगभग 217 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी।

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अगले 15 दिनों में एनडीआरएफ सहायता और बीमा राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर देगी।

इस बीच विधायक शेखर निकम ने कहा कि रत्नागिरी की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट 10 जून को ही सौंपी जा चुकी है, जिसमें भारी नुकसान की पुष्टि हुई है।

एनडीआरएफ राशि को अपर्याप्त बताते हुए उन्होंने प्रति हेक्टेयर कम से कम 1,00,000 रुपए की सहायता की मांग की। साथ ही उन्होंने कृषि ऋण को मध्यम अवधि से सीधे फसल ऋण में बदलने और कर्ज माफी की भी मांग की।

हंगामा बढ़ने पर कोंकण के विधायकों ने सदन की कार्यवाही रोकने की चेतावनी दी और स्पीकर द्वारा अगले प्रश्न पर जाने के बावजूद विरोध जारी रखा।

स्थिति को शांत करने के लिए मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि सरकार नुकसान की असाधारण स्थिति को समझती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार मानक एनडीआरएफ सीमा से आगे जाकर सहायता देने के लिए पूरी तरह तैयार है और कोंकण के आम और काजू किसानों को अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय पैकेज दिया जाएगा।

इसके बाद विरोध कर रहे विधायकों का आक्रोश शांत हुआ और चर्चा समाप्त हुई।


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