महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने 69 उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत पर जांच के दिए आदेश
महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य की 29 नगर निगमों में निर्विरोध चुने गये 69 प्रत्याशियों के मामलों की राज्यव्यापी जांच के आदेश दिये हैं। यह कार्रवाई नामांकन वापसी की अंतिम तिथि दो जनवरी से पहले कथित दबाव, धमकी और प्रलोभन देकर बड़े पैमाने पर नामांकन वापस कराए जाने के आरोपों के बाद की गयी है

69 उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत पर महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने दिये जांच के आदेश
मुंबई। महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य की 29 नगर निगमों में निर्विरोध चुने गये 69 प्रत्याशियों के मामलों की राज्यव्यापी जांच के आदेश दिये हैं। यह कार्रवाई नामांकन वापसी की अंतिम तिथि दो जनवरी से पहले कथित दबाव, धमकी और प्रलोभन देकर बड़े पैमाने पर नामांकन वापस कराए जाने के आरोपों के बाद की गयी है।
निर्वाचन आयोग ने एक असाधारण और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निर्देश दिया है कि इन निर्विरोध जीतों के परिणामों की औपचारिक अधिसूचना जांच पूरी होने तक जारी नहीं की जायेगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 69 में से 68 सीटें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को मिली हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 44 सीटें, शिवसेना को 22 सीटें और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को दो सीटें मिली हैं, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है।
इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध सीटों ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। निर्वाचन आयोग की यह कार्रवाई कांग्रेस, जनता दल (सेक्युलर) और आम आदमी पार्टी (आप) सहित कई विपक्षी दलों की ओर से दर्ज की गयी औपचारिक शिकायतों के बाद हुई है। विपक्ष का आरोप है कि उनके उम्मीदवारों को दबाव, धमकी, पुलिस तंत्र के दुरुपयोग और आर्थिक प्रलोभनों के ज़रिए नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया।
आयोग ने यह जानने के लिए नगर आयुक्तों, ज़िला कलेक्टरों, निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस आयुक्तों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है कि नामांकन वापसी स्वैच्छिक थी या अवैध तरीकों से करवायी गयी। सबसे अधिक निर्विरोध सीटें कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में सामने आयी हैं, जहां 22 उम्मीदवार बिना मुकाबले चुने गये। इसके अलावा जलगांव में 12, ठाणे में सात और पनवेल, भिवंडी, धुले, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और अहिल्यानगर में भी कई सीटें निर्विरोध रहीं।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) सहित 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को निर्धारित है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा चुनाव कानून के तहत नामांकन वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद नये नामांकन स्वीकार नहीं किये जा सकते। न ही केवल नामांकन वापसी के आधार पर निर्वाचित उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराया जा सकता है।
यदि जांच में अधिकारों के दुरुपयोग या चुनावी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है तथा इसके निष्कर्ष भविष्य की चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि विवाद खास तौर पर मुंबई के कोलाबा क्षेत्र में तेज़ रहा, जहां विपक्षी नेताओं ने महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर नामांकन प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। आयोग ने इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए मुंबई नगर आयुक्त को निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के निर्देश दिये हैं। नार्वेकर ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है।
विपक्षी नेताओं संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर निर्विरोध जीतें सुनिश्चित कर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया, जबकि महायुति नेताओं ने कहा कि यह संगठनात्मक मज़बूती और जनसमर्थन का परिणाम है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि उसने शिकायतों को गंभीरता से लिया है और जांच पूरी होने तक निर्विरोध चुने गए प्रत्याशियों के परिणामों की आधिकारिक पुष्टि रोकी जाएगी। इस जांच के नतीजों का महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों की विश्वसनीयता और भविष्य की चुनावी प्रक्रिया पर दूरगामी असर पड़ सकता है।


