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मानसून सत्र में नीट पेपर लीक, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो: आनंद दुबे

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र को लेकर कहा कि इस बार सदन में देश से जुड़े अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। संसद का समय जनता के टैक्स के पैसे से चलता है, इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि सदन सुचारु रूप से चले और जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस हो।

मानसून सत्र में नीट पेपर लीक, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो: आनंद दुबे
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मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र को लेकर कहा कि इस बार सदन में देश से जुड़े अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। संसद का समय जनता के टैक्स के पैसे से चलता है, इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि सदन सुचारु रूप से चले और जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस हो।

आनंद दुबे ने कहा कि आगामी मानसून सत्र में नीट पेपर लीक, बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार, राम मंदिर में चोरी की घटना और वैश्विक स्तर पर बन रहे युद्ध जैसे हालात प्रमुख मुद्दे होने चाहिए। ऐसे समय में भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति पर भी संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री से अपील करते हुए कहा कि उनकी जिम्मेदारी है कि संसद बिना किसी व्यवधान के चले। करोड़ों रुपए जनता के टैक्स से संसद के संचालन पर खर्च होते हैं, इसलिए यह धन व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि चूंकि यह मानसून सत्र है, इसलिए ऐसा न हो कि बाद में कहा जाए कि सब कुछ 'मानसून के पानी में बह गया।' यदि संसद सकारात्मक माहौल में चलेगी तो जनता के हित में महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकेंगे और लोकतंत्र में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।

अभिनेता आमिर खान को कथित तौर पर गैंगस्टर की ओर से मिली धमकी पर आनंद दुबे ने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति को धमकी मिलती है तो उसे तुरंत पुलिस के पास जाना चाहिए। कानून अपना काम करेगा और पुलिस यह जांच करेगी कि धमकी किसने, क्यों और किस उद्देश्य से दी है। इससे पहले अभिनेता सलमान खान को भी धमकियां मिली थीं और बाबा सिद्दीकी की दिनदहाड़े हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि लगातार इस प्रकार की धमकियां क्यों मिल रही हैं और इनके पीछे कौन लोग हैं। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारी होनी चाहिए।

आनंद दुबे ने कहा कि पहले 1990 के दशक में दाऊद इब्राहिम के डी-गैंग और बाद में अन्य अपराधी गिरोह धमकियां देते थे। यदि सरकार यह दावा करती है कि बड़े अपराधी गिरोह समाप्त हो चुके हैं, तो फिर इस तरह की नई धमकियां कहां से आ रही हैं और इनके पीछे कौन लोग हैं, इसका जवाब सरकार और कानून-व्यवस्था से जुड़े तंत्र को देना चाहिए। आम नागरिक के तौर पर लोग केवल पुलिस को सूचना दे सकते हैं, उसके बाद कार्रवाई करना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

जालंधर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आम आदमी पार्टी को 'कट्टर बेईमान पार्टी' कहे जाने पर आनंद दुबे ने कहा कि पंजाब में चुनाव होने वाले हैं और ऐसे समय में भाजपा राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रही है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, इसलिए प्रधानमंत्री का विपक्ष पर हमला करना राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जिस प्रकार भाजपा विपक्ष पर हमला करती है, उसी प्रकार विपक्ष भी भाजपा की आलोचना करता है। लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है।

उद्धव ठाकरे के 'राम रक्षा आंदोलन' पर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सदियों से राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ होता आया है। रीराम मंदिर में चोरी की घटना से श्रद्धालुओं के मन में दुख और आक्रोश है। भगवान राम से यही प्रार्थना है कि दोषियों को सजा मिले और ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था बने जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न हों। भगवान राम और हनुमान की आराधना करना हर व्यक्ति का अधिकार है और इस पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता।

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई यह मानता है कि केवल वही हिंदुत्व या भगवान राम की बात कर सकता है, तो यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) और उद्धव ठाकरे हमेशा भगवान राम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते रहे हैं। दुबे ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उद्धव ठाकरे अयोध्या गए थे। वर्ष 2022 में महाराष्ट्र की तत्कालीन शिवसेना नेतृत्व वाली टीम भी अयोध्या पहुंची थी। वहीं, 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रण नहीं मिलने पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता नासिक के कालाराम मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। भगवान राम की आराधना किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था का विषय है और हर व्यक्ति को उनकी पूजा-अर्चना करने का समान अधिकार है।


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