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राष्ट्रभक्ति में सिर तन से जुदा हो जाए तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता : नाजिया इलाही खान

लेंसकार्ट के कर्मचारी ड्रेस कोड और ग्रूमिंग पॉलिसी को लेकर जारी विवाद में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की नेता नाजिया इलाही खान ने कड़ा रुख अपनाया है

राष्ट्रभक्ति में सिर तन से जुदा हो जाए तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता : नाजिया इलाही खान
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पुणे। लेंसकार्ट के कर्मचारी ड्रेस कोड और ग्रूमिंग पॉलिसी को लेकर जारी विवाद में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की नेता नाजिया इलाही खान ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर नाजिया ने मुंबई के अंधेरी स्थित लेंसकार्ट स्टोर का दौरा किया और प्रबंधक मोहसिन खान से सीधा सवाल-जवाब किया।

नाजिया इलाही खान ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्य और विडंबना की बात है कि भारत में 120 करोड़ से अधिक हिंदुओं की आबादी है और बहुसंख्यक हिंदू होने के बावजूद भी आज यह सामना करना पड़ता है कि हमारे हिंदू भाई-बहन रुद्राक्ष नहीं पहन सकते, तिलक नहीं लगा सकते, टीका नहीं लगा सकते, मंगलसूत्र नहीं पहन सकतीं, हमारी विवाहित बेटियां-बहनें, सिंदूर नहीं लगा सकतीं, कलावा नहीं पहन सकतीं।

उन्होंने सवाल किया कि हम कहां जाकर के अपने कानूनी अधिकार को, अपने संवैधानिक अधिकार को मांगें? यूएई और गल्फ में मांगें, पाकिस्तान में मांगें क्या?

नाजिया ने बताया कि उन्होंने अंधेरी के लेंसकार्ट स्टोर समेत कई दुकानों का दौरा किया। मैं जब अंधेरी के लेंसकार्ट शॉप में गई, बहुत ही प्यार से, बहुत ही मोहब्बत से मैंने पूछा कि यहां पर मैनेजर कौन है। मैनेजर आया मोहसिन खान। इससे पहले मैंने 10-12 लेंसकार्ट स्टोर विजिट किया, सबमें मुसलमान मैनेजर। जो 10वीं पास हैं। लेकिन, जो ग्रेजुएशट हैं, वो उसके अंदर काम कर रहे हैं। इसका मतलब है कि एक स्ट्रेटेजी है।

उन्होंने प्रबंधक से पूछा कि क्या वे इफ्तार करते हैं और नमाज पढ़ते हैं। जवाब मिलने पर नाजिया ने कहा, “तुम नमाज पढ़ लेते हो, तुम इफ्तार कर लेते हो और खुद जो लेंसकार्ट के ओनर हैं, वो अपने हैंडबिल पर छाप रहे हैं कि हिजाब की इजाजत दे रहे हैं। फिर क्या उनको दुश्मनी है भारतीय संस्कृति, संस्कार से और सनातन धर्म की पहचान से? मुझे कहीं न कहीं अंदेशा है कि लेंसकार्ट के ओनर का संबंध देशविरोधी ताकतों से है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों, राज्य सरकार और पुलिस से तुरंत कंपनी के सभी शोरूम बंद करने, जांच करने और लाइसेंस पर शर्तें लगाने की मांग की।

नाजिया ने कहा कि जिस तरीके से टीसीएस का मामला सामने आया, लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के मॉड्यूल बस्ट हो रहे हैं, लव जिहाद, लैंड जिहाद, अबॉर्शन जिहाद, धर्मांतरण, तो मुझे तो शक लग रहा है कि ये भी एक प्रॉक्सी तरीका है, शरिया लागू करने का। उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महमूद मदनी के 2026 के बयान का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमान अपनी धार्मिक आजादी का पूरा फायदा उठा रहे हैं, जबकि हिंदुओं को तिलक, मंगलसूत्र और सिंदूर जैसी पहचान से वंचित किया जा रहा है। मैं तो प्रैक्टिसिंग मुस्लिम हूं, लेकिन सनातन धर्म में मंगलसूत्र और सिंदूर का बहुत बड़ा वैल्यू होता है। ये डबल स्टैंडर्ड की कार्रवाई है।

नाजिया ने कहा कि अगर कंपनी के मालिक ने तुरंत स्टेटमेंट नहीं दिया और सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले 72 घंटों में मेरा पिटीशन सर्वोच्च न्यायपालिका में होगा। टीसीएस विवाद पर उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक पूरी जांच न हो, मुसलमानों को कॉर्पोरेट, प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में नई नौकरियां नहीं दी जानी चाहिए।

नाजिया ने आगे कहा कि मैं मुसलमान हूं, संवैधानिक मुसलमान हूं। मैं नमाज इसी भारत की भूमि पर पढ़ती हूं। पैगंबर मोहम्मद ने कहा है कि जिस धरती पर रहते हो, उसकी हिफाजत करो। ये रेडिकल मुसलमान जो जिहाद के नाम पर देश का नुकसान कर रहे हैं, वो न देश के रह गए हैं, न इस्लाम के, वो सिर्फ जॉम्बीज रह गए हैं। उन्होंने कहा कि उनका अभियान निरंतर चल रहा है और लश्कर-ए-तैयबा, आईएसआई से धमकियां मिलती रहती हैं, लेकिन राष्ट्रभक्ति में सिर तन से जुदा हो जाए तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता।


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