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दिशा सालियान मर्डर केस: सीबीआई ने दर्ज की FIR, उद्धव-आदित्य समेत 17 लोगों के नाम; क्या हैं आरोप?

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज FIR में CBI आपराधिक साजिश, हत्या, सामूहिक दुष्कर्म और सबूतों से कथित छेड़छाड़ जैसे आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दिशा की मौत के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और क्या शुरुआती जांच में किसी महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी हुई थी।

दिशा सालियान मर्डर केस: सीबीआई ने दर्ज की FIR, उद्धव-आदित्य समेत 17 लोगों के नाम; क्या हैं आरोप?
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मुंबई: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में करीब छह साल बाद जांच का नया दौर शुरू हो गया है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में FIR दर्ज की है। FIR में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई नामों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, परमबीर सिंह और रोहन रॉय समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोपों की जांच की जाएगी। हालांकि, FIR में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। CBI जांच के दौरान आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी।

किन एंगल से होगी जांच?

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज FIR में CBI आपराधिक साजिश, हत्या, सामूहिक दुष्कर्म और सबूतों से कथित छेड़छाड़ जैसे आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दिशा की मौत के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और क्या शुरुआती जांच में किसी महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी हुई थी। CBI अब घटनाक्रम से जुड़े लोगों के बयान, मेडिकल और फॉरेंसिक रिकॉर्ड तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल कर सकती है।

8 जून 2020 को हुई थी दिशा की मौत

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह उस समय 14वीं मंजिल पर थीं। शुरुआती पुलिस जांच में उनकी मौत को आत्महत्या माना गया था। इस घटना के ठीक छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच समय का अंतर कम होने के कारण बाद में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे सामने आए और दोनों मामलों को जोड़कर भी सवाल उठाए गए।

शुरुआती जांच में क्या सामने आया था?

दिशा सालियान की मौत की शुरुआती जांच कुछ महीनों में बंद कर दी गई थी। अक्टूबर 2020 में पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था। बाद में दिसंबर 2023 में मामले को दोबारा खोला गया और एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। पुलिस की ओर से बाद की जांच में भी आत्महत्या की थ्योरी को बरकरार रखा गया था। 2025 में दिए गए हलफनामे में भी पुलिस ने साजिश के आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उपलब्ध गवाहों और फॉरेंसिक जांच से आत्महत्या की बात सामने आई।

दिशा के पिता ने लगाए गंभीर आरोप

दिशा के पिता सतीश सालियान लंबे समय से मामले की दोबारा जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या हुई तथा पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। CBI ने दिशा के पिता का बयान भी दर्ज किया है। माना जा रहा है कि जांच के शुरुआती चरण में उनका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है। उन्होंने जांच की दिशा में आगे बढ़ने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह करीब छह साल से इसका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी को खोने के बाद उनके लिए इसे खुशी का मौका नहीं कहा जा सकता, लेकिन उन्हें अब राहत महसूस हो रही है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर भी उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से जुड़े कुछ पहलुओं पर भी चर्चा हुई। अदालत को बताया गया कि दिशा का पोस्टमॉर्टम एक डॉक्टर ने किया था, जबकि निर्धारित दिशानिर्देशों के मुताबिक दो डॉक्टरों की मौजूदगी अपेक्षित थी। रिपोर्ट में सिर, हाथ, पैर और छाती पर चोटों का उल्लेख होने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम और अन्य फॉरेंसिक जांच में यौन हमले या दुष्कर्म के प्रमाण नहीं मिले। पुलिस के मुताबिक, गवाहों और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मौत को आत्महत्या माना गया था।

हाई कोर्ट ने जांच में देरी पर उठाए सवाल

मामले में हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच और FIR दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए थे। अदालत की ओर से यह सवाल उठाया गया कि इतने वर्षों तक FIR दर्ज क्यों नहीं की गई और मामले को केवल हादसे या आत्महत्या के रूप में क्यों देखा गया। इसी के बाद CBI को FIR दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने जांच की निगरानी एक अनुभवी वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से करने को भी कहा था।

अब CBI के सामने क्या चुनौती?

CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती छह साल पुराने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों की विश्वसनीयता और घटनाक्रम की कड़ियों को दोबारा जोड़ना होगी। एजेंसी को यह भी देखना होगा कि शुरुआती जांच में कोई महत्वपूर्ण सबूत छूटा था या नहीं। मामले में सामने आए आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन इनकी पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही होगी। अब CBI की जांच यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि दिशा सालियान की मौत के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और क्या इस मामले में आपराधिक साजिश या अन्य अपराध के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।


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