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बीएमसी चुनाव में बहुमत के बावजूद बेचैनी, शिंदे ने 29 पार्षदों को पांच सितारा होटल में ठहराया,

राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जब महायुति के पास बहुमत से ज्यादा सीटें हैं, तब शिंदे को अपने पार्षदों को ‘सुरक्षित’ रखने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है, यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।

बीएमसी चुनाव में बहुमत के बावजूद बेचैनी, शिंदे ने 29 पार्षदों को पांच सितारा होटल में ठहराया,
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मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में भाजपा नीत महायुति को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद सत्तारूढ़ खेमे में सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री और शिवसेना (शिंदे) प्रमुख एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के नवनिर्वाचित सभी 29 पार्षदों को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में ठहरा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, अगले तीन दिनों तक ये सभी पार्षद होटल में ही रहेंगे और इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता उनसे मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जब महायुति के पास बहुमत से ज्यादा सीटें हैं, तब शिंदे को अपने पार्षदों को ‘सुरक्षित’ रखने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है, यह चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।

संख्याबल में महायुति मजबूत


227 सदस्यीय मुंबई महानगरपालिका में इस बार भाजपा ने 89 सीटें हासिल की हैं, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) को 29 सीटें मिली हैं। इस तरह दोनों दल मिलकर 118 के आंकड़े पर पहुंच जाते हैं, जबकि बहुमत के लिए केवल 114 सीटों की आवश्यकता होती है। संख्याबल के लिहाज से देखें तो महायुति की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित नजर आती है। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे की बात करें तो शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) 65 सीटों के साथ दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस को 24 सीटें मिली हैं, जबकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को केवल छह पार्षदों पर संतोष करना पड़ा है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे तीनों को मिलाकर भी बहुमत का आंकड़ा दूर की कौड़ी नजर आता है। इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि जब विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है, तो फिर शिंदे किस आशंका के चलते अपने पार्षदों को पांच सितारा होटल में ठहराने को मजबूर हुए हैं।

मेयर पद को लेकर बढ़ती खींचतान


दरअसल, असली विवाद मेयर पद को लेकर उभरता दिखाई दे रहा है। मुंबई में शिवसेना (शिंदे) की सिर्फ 29 सीटें होने के बावजूद पार्टी के कुछ नेता मेयर पद पर अपना दावा ठोंकने लगे हैं। भाजपा, जो महायुति में सबसे बड़ी पार्टी है, स्वाभाविक तौर पर मेयर पद पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यही मुद्दा आने वाले दिनों में महायुति के भीतर तनाव का कारण बन सकता है। यह स्थिति काफी हद तक वैसी ही मानी जा रही है, जैसी पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव के बाद देखने को मिली थी, जब एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री पद पर अड़ जाने से गठबंधन में कड़वाहट पैदा हो गई थी। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा है कि मेयर पद का फैसला आपसी बातचीत से किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा, “मेयर महायुति का ही बनेगा और इस पर कोई विवाद नहीं है। मैं और उपमुख्यमंत्री शिंदे बैठकर इसका समाधान निकाल लेंगे।”

ठाणे में उलट तस्वीर


मुंबई के साथ-साथ बृहन्मुंबई क्षेत्र की अन्य आठ महानगरपालिकाओं के चुनाव भी भाजपा और शिवसेना (शिंदे) ने मिलकर लड़े हैं। इनमें दूसरी सबसे अहम महानगरपालिका शिंदे के गृह नगर ठाणे की है। यहां 131 सदस्यीय सदन में शिवसेना को 75 सीटें मिली हैं, जबकि भाजपा ने 28 सीटें जीती हैं। संख्याबल के आधार पर ठाणे में शिंदे की पार्टी अकेले ही मेयर बना सकती है। इसके बावजूद ठाणे के भाजपा नेता, जो चुनाव के दौरान शिंदे के साथ थे, अब सत्ता में उनके साथ रहने के बजाय विपक्ष में बैठने की इच्छा जता रहे हैं। यह रुख भी महायुति के भीतर बढ़ती असहजता की ओर इशारा करता है।

होटल पॉलिटिक्स के मायने


भारतीय राजनीति में चुनाव के बाद पार्षदों या विधायकों को होटल में ठहराना कोई नई बात नहीं है। इसे आमतौर पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ या टूट-फूट की आशंका से जोड़कर देखा जाता है। शिंदे द्वारा 29 पार्षदों को एक साथ पांच सितारा होटल में रखना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक सेंध या दबाव से उन्हें दूर रखा जा सके। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में न केवल मेयर पद, बल्कि स्थायी समिति, विभिन्न समितियों के अध्यक्ष पद और सत्ता के बंटवारे को लेकर भी चर्चा होगी।

सब कुछ उतना सहज नहीं


फिलहाल, महायुति के पास स्पष्ट बहुमत है और सरकार बनाने में कोई संवैधानिक अड़चन नहीं है। लेकिन मेयर पद और सत्ता-साझेदारी को लेकर अंदरखाने चल रही खींचतान यह संकेत दे रही है कि सब कुछ उतना सहज नहीं है, जितना आंकड़ों से दिखाई देता है। आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि भाजपा और शिवसेना (शिंदे) के बीच सहमति बनती है या फिर बीएमसी की सत्ता भी महायुति के भीतर नए राजनीतिक समीकरणों और तनाव का अखाड़ा बनती है। मुंबई की राजनीति में फिलहाल निगाहें होटल में चल रही बैठकों और वहां से निकलने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।


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