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BMC Mayor Election: बीएमसी के लिए रितु तावड़े भाजपा की महापौर पद की उम्मीदवार घोषित, शिवसेना के संजय शंकर घाड़ी होंगे डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार
रितु तावड़े मराठा समुदाय से आती हैं, लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव गुजराती बहुल क्षेत्र घाटकोपर में भी मजबूत रहा है। उन्होंने वहां बड़े अंतर से चुनाव जीतकर यह साबित किया है कि वह विभिन्न सामाजिक समूहों को जोड़ने की क्षमता रखती हैं।

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महापौर पद के लिए रितु तावड़े को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस बार मुंबई मेयर का पद महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है, ऐसे में भाजपा ने रणनीतिक तौर पर अनुभवी और प्रभावशाली नेता रितु तावड़े पर दांव खेला है। यदि वह महापौर चुनी जाती हैं, तो यह मुंबई के इतिहास में पहली बार होगा जब बीएमसी में भाजपा का मेयर बनेगा। दूसरी ओर, शिवसेना के शिंदे गुट ने उपमहापौर पद के लिए दावा पेश किया है। पार्टी की ओर से संजय शंकर घाड़ी को डिप्टी मेयर पद का उम्मीदवार बनाया गया है। इस तरह बीएमसी की सत्ता संरचना में महायुति गठबंधन की स्पष्ट पकड़ दिखाई दे रही है।
कौन हैं रितु तावड़े? रितु तावड़े का जन्म 18 अप्रैल 1973 को हुआ। उन्होंने एस.वाई.बी.कॉम (S.Y.B.Com) तक शिक्षा प्राप्त की है। उनके पति राजेश तावड़े एक उद्यमी हैं। उनके परिवार में एक बेटा यश, जो कंप्यूटर इंजीनियर है, और एक बेटी मधुरा, जो अधिवक्ता हैं, शामिल हैं। पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है।
राजनीतिक सफर और अनुभव
रितु तावड़े का राजनीतिक अनुभव व्यापक और लगातार सक्रिय रहा है। वह 2012 में प्रभाग 127 से, 2017 में प्रभाग 121 से और 2025 में प्रभाग 132 से चुनाव जीत चुकी हैं। लगातार तीन बार पार्षद चुना जाना उनके क्षेत्रीय प्रभाव और संगठनात्मक मजबूती को दर्शाता है। वह बीएमसी की शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्षा रह चुकी हैं, जहां उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका निभाई। इसके अलावा, वह महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। संगठनात्मक स्तर पर उनकी सक्रियता और प्रशासनिक समझ को भाजपा नेतृत्व ने महापौर पद के लिए उपयुक्त माना है।
मराठी-गुजराती संतुलन का चेहरा रितु तावड़े मराठा समुदाय से आती हैं, लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव गुजराती बहुल क्षेत्र घाटकोपर में भी मजबूत रहा है। उन्होंने वहां बड़े अंतर से चुनाव जीतकर यह साबित किया है कि वह विभिन्न सामाजिक समूहों को जोड़ने की क्षमता रखती हैं। भाजपा उन्हें एक आक्रामक और स्पष्टवादी मराठी चेहरे के रूप में पेश कर रही है, जो मुंबई की विविध सामाजिक संरचना में मराठी और गुजराती मतदाताओं के बीच संतुलन स्थापित कर सकती हैं। बीएमसी जैसे बहुस्तरीय प्रशासनिक निकाय में यह संतुलन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
महिला नेतृत्व और सामाजिक सक्रियता रितु तावड़े की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व के सशक्त चेहरे के रूप में भी है। महिलाओं के सम्मान और अश्लील विज्ञापनों के खिलाफ उनके आंदोलनों ने राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा बटोरी। घाटकोपर में पानी की किल्लत के मुद्दे पर उन्होंने ‘हंडा मोर्चा’ निकाला था। इस आंदोलन के जरिए उन्होंने पानी माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाई, जिसके बाद प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। इस पहल ने उन्हें जमीनी मुद्दों पर सक्रिय और संघर्षशील नेता के रूप में स्थापित किया। ‘महिला आर्थिक विकास महामंडल’ की पूर्व निदेशक के तौर पर उन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दिया। महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उनका लगातार जोर भाजपा के लिए भी एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। बीएमसी चुनाव के दौरान उन्होंने यह घोषणा की थी कि उनका लक्ष्य मुंबईवासियों को ‘शासन आपल्या दारी’ और ‘लाडकी बहीण’ जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है। इससे साफ है कि उनका फोकस प्रशासनिक योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर रहेगा।
गठबंधन और सत्ता का गणित
बीएमसी में इस बार सत्ता का समीकरण महायुति गठबंधन के पक्ष में है। भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिंदे नीत शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। दोनों की संयुक्त संख्या 118 होती है, जो बहुमत के लिए आवश्यक 114 के आंकड़े से अधिक है। इस स्पष्ट बहुमत के चलते महायुति गठबंधन अपने उम्मीदवार को महापौर बनाने की स्थिति में है। यही कारण है कि भाजपा ने महापौर पद अपने पास रखते हुए रितु तावड़े को उम्मीदवार बनाया है, जबकि शिंदे गुट को उपमहापौर पद दिया गया है। यह परिणाम बीते 25 वर्षों से बीएमसी पर काबिज रही शिवसेना (अब शिवसेना-यूबीटी) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। लंबे समय बाद महानगरपालिका की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
राजनीतिक महत्व और आगे की चुनौतियां
मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और बीएमसी एशिया की सबसे समृद्ध नगरपालिकाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में महापौर पद केवल औपचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि रितु तावड़े महापौर बनती हैं, तो उनके सामने कई चुनौतियां होंगी बुनियादी ढांचे का विकास, पानी और सफाई व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, झुग्गी पुनर्विकास और पारदर्शी प्रशासन जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भाजपा के लिए यह अवसर है कि वह पहली बार बीएमसी में अपनी प्रशासनिक छाप छोड़े। वहीं, रितु तावड़े के लिए यह मौका उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है।
ऐतिहासिक बदलाव का चेहरा
रितु तावड़े का महापौर पद के लिए नामांकन भाजपा की रणनीतिक और सामाजिक दृष्टि को दर्शाता है। महिला आरक्षण, मराठी पहचान, गुजराती समर्थन और जमीनी सक्रियता—इन सभी पहलुओं का संतुलन उनके चयन में झलकता है। महायुति के स्पष्ट बहुमत के बीच अब निगाहें महापौर चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि सब कुछ गठबंधन की रणनीति के अनुसार रहा तो मुंबई को पहली बार भाजपा का मेयर मिलेगा और रितु तावड़े इस ऐतिहासिक बदलाव का चेहरा होंगी।
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