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महाराष्ट्र की संत परंपरा के विपरीत है अशोक खरात जैसा प्रकरण: राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार को खुद को “शाही ज्योतिषी” बताने वाले अशोक खरात से जुड़े मामले में सामने आ रही चौंकाने वाली जानकारियों पर गहरी नाराजगी जताई

महाराष्ट्र की संत परंपरा के विपरीत है अशोक खरात जैसा प्रकरण: राज ठाकरे
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मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार को खुद को “शाही ज्योतिषी” बताने वाले अशोक खरात से जुड़े मामले में सामने आ रही चौंकाने वाली जानकारियों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने राज्य के नैतिक पतन पर सवाल उठाए, जिसकी पहचान कभी संतों और समाज सुधारकों की परंपरा से होती थी।

उन्होंने संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और गाडगे बाबा जैसे महान संतों वाले महाराष्ट्र और आज की स्थिति के बीच के अंतर को उजागर किया। उनका कहना था कि आज की स्थिति में खरात जैसे लोग कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे हैं।

राज ठाकरे ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, “हमने युवाओं को महाराष्ट्र की समृद्ध परंपराओं से परिचित कराया लेकिन आज आधुनिक नेताओं को तर्क और ‘गीता रहस्य’ जैसी सोच छोड़कर खरात जैसे लोगों के आगे झुकते देखना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि डरावना भी है।”

राज ठाकरे के पोस्ट ने एक दुखद विरोधाभास” की ओर इशारा किया। इसमें कहा गया कि कई मौजूदा विधायक, जिनके इस घोटाले में फंसने की आशंका है, वही लोग हैं, जिन्होंने दिसंबर 2013 में अंधविश्वास और काला जादू विरोधी कानून पारित किया था। इससे यह सवाल उठता है कि सत्ता की लालसा ने तर्क और विज्ञान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को कमजोर कर दिया है।

उन्होंने राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में एक चिंताजनक पैटर्न की भी बात की, जिसमें सत्ता की होड़, पद खोने का डर और नौकरशाही की मिलीभगत शामिल है। राज ठाकरे ने कहा, “टिकट पाने की होड़ के बाद मंत्री बनने की इच्छा और फिर पद छिनने का डर नेताओं को ऐसे लोगों से मदद लेने के लिए मजबूर करता है, जो खुद को चमत्कारी बताते हैं। ऐसे आरोप भी हैं कि कुछ अधिकारी मंत्रियों के सलाहकार बनकर सत्ता के करीब बने रहने की कोशिश करते हैं।”

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस दावे को स्वीकार करते हुए कि सरकार ने ही इस मामले का खुलासा किया है, राज ठाकरे ने कहा कि इससे मामले के सामने आने के समय को लेकर कई सवाल उठते हैं।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि अगर सरकार इस जांच का श्रेय लेना चाहती है, तो उसे उस खुफिया विफलता की जिम्मेदारी भी लेनी होगी, जिसके कारण उसकी निगरानी में यह मामला सामने आया।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी चर्चाएं बढ़ रही हैं कि इस मामले का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से किया जा रहा है, ताकि महत्वाकांक्षी प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर किया जा सके। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि एक बार राजनीतिक लक्ष्य हासिल हो जाने के बाद इस जांच को धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

राज ठाकरे ने मीडिया को चेतावनी देते हुए कहा, “इस तरह की ‘धोबी-पछाड़’ राजनीति में मोहरा न बनें। इस मामले को तब तक शांत न होने दें, जब तक अशोक खरात और उसके सहयोगियों को सख्त सजा न मिल जाए।”

उन्होंने नागरिकों को भी सावधान किया और कहा कि कीर्तन और ज्ञानेश्वरी जैसी समृद्ध परंपराओं के बावजूद अगर लोग ऐसे प्रतिनिधियों को चुनते रहेंगे, तो महाराष्ट्र का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

राज ठाकरे ने अंत में कहा कि वे युवाओं को महाराष्ट्र की असली और प्रगतिशील पहचान के बारे में लगातार जागरूक करते रहेंगे। उन्होंने राज्य से अपील की कि ऐसे लोगों की बेशर्मी को नकारें, जो राजनीतिक फायदे के लिए अपने नैतिक मूल्यों से समझौता करते हैं।


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