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कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने वाले थे अजित पवार : किरण गुजर

महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के करीबी सहयोगी और विश्वसनीय सहयोगी किरण गुजर ने गुरुवार को उनके आखिरी दिनों और राजनीतिक इच्छाओं पर भावुक खुलासा किया है।

कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने वाले थे अजित पवार : किरण गुजर
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पुणे। महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के करीबी सहयोगी और विश्वसनीय सहयोगी किरण गुजर ने गुरुवार को उनके आखिरी दिनों और राजनीतिक इच्छाओं पर भावुक खुलासा किया है।

बारामती विमान हादसे में अजित पवार की मौत के बाद राज्य की राजनीति में उठे सवालों के बीच किरण गुजर ने बताया कि दादा (अजित पवार) की आखिरी इच्छा कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने की थी, जो अब पूरी होनी चाहिए थी।

किरण गुजर ने कहा, "यह दादा की आखिरी इच्छा थी। उन्होंने तय कर लिया था कि अब समय आ गया है कि यह होना चाहिए और यह अब होना ही चाहिए। पांच दिन पहले भी उन्होंने मुझसे कहा था, 'किरण, यह अब होना ही चाहिए। हम इसे अब करेंगे'।"

गुजर ने आगे कहा कि दादा ने राजनीतिक स्थिति को देखते हुए कुछ बड़े फैसले लेने का मन बना लिया था। उन्होंने इशारों में कहा कि उस समय टिप्पणियां और चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन असल मुद्दा यह नहीं है कि वह फैसला हुआ या नहीं, बल्कि दादा की मंशा और उस समय की परिस्थितियां महत्वपूर्ण थीं।

गुजर ने बारामती की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "मुझे पूरे महाराष्ट्र के बारे में नहीं पता, लेकिन जहां तक बारामती की बात है, मुझे यकीन नहीं है कि वहां चीजें कैसी होंगी। एक दादा चले गए हैं, और दूसरे दादा (शरद पवार) अभी बारामती में कमान नहीं संभाल सकते।"

उन्होंने इशारा किया कि अजित पवार के जाने के बाद बारामती में एनसीपी (अजित गुट) और एनसीपी (शरद गुट) के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। बारामती हमेशा से पवार परिवार का गढ़ रहा है, लेकिन अब नेतृत्व की कमी से पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है।

किरण गुजर ने बताया कि अजित पवार आखिरी दिनों में काफी सक्रिय थे और राज्य के विकास, कृषि सुधारों और पार्टी संगठन पर फोकस कर रहे थे। विमान हादसे से पहले उन्होंने कई बैठकों में भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की थी। गुजर ने भावुक होकर कहा कि दादा का जाना न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अजित पवार की विरासत को संभालें और बारामती को मजबूत बनाए रखें।


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