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प्रवासी गन्ना श्रमिकों के बच्चों के लिए 82 छात्रावास शुरू करेगा महाराष्ट्र

महाराष्ट्र सरकार ने संत भगवान बाबा सरकारी छात्रावास योजना के तहत राज्य में प्रवासी गन्ना श्रमिकों के बच्चों के लिए 82 स्थायी आवासीय आवास उपलब्ध कराने का फैसला किया है

प्रवासी गन्ना श्रमिकों के बच्चों के लिए 82 छात्रावास शुरू करेगा महाराष्ट्र
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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने संत भगवान बाबा सरकारी छात्रावास योजना के तहत राज्य में प्रवासी गन्ना श्रमिकों के बच्चों के लिए 82 स्थायी आवासीय आवास उपलब्ध कराने का फैसला किया है। राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल में यह निर्णय लिया गया है।

इस योजना के तहत पहले चरण में बीड, अहमदनगर, जालना, नांदेड़, परभणी, उस्मानाबाद, लातूर, औरंगाबाद, नासिक और जलगांव में वर्तमान शैक्षणिक वर्ष से लड़कों और लड़कियों के लिए 10 अलग-अलग छात्रावास शुरू किए जाएंगे।

मंत्री ने कहा कि इन्हें 100-100 की क्षमता वाले किराए के भवनों में शुरू किया जाएगा, जिसमें बच्चों को मुफ्त रहने और भोजन की सुविधा उपलब्ध होगी, क्योंकि नए छात्रावासों के निर्माण में समय लगेगा।

इस योजना को सितंबर 2019 में पिछली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया था, लेकिन यह सुस्त हो पड़ गई और मुंडे ने इसे दिवंगत केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की स्मृति में एक सच्ची श्रद्धांजलि करार दिया, जो उनके चाचा थे।

मुंडे ने कहा कि महाराष्ट्र में 232 चीनी मिलें हैं, जिनमें 800,000 से अधिक श्रमिक हैं, दोनों पुरुष और महिलाएं गन्ना कटर के रूप में कार्यरत हैं।

हालांकि, उनमें से अधिकांश अनिश्चित तरीके से खानाबदोश जैसा जीवन जीने पर मजबूर हैं। गन्ने के खेतों में काम करने के दौरान उनका अलग-अलग जगहों पर पलायन जारी रहता है, जिससे उनके बच्चों की शिक्षा भी काफी प्रभावित होती है। इसी वजह से इन श्रमिकों के बच्चों की ड्रॉपआउट रेट (स्कूल छोड़ने की दर) अधिक रहती है और छोटे बच्चों को अपने माता-पिता के साथ अलग-अलग जगहों की यात्रा करने पर मजबूर होना पड़ता है। इस योजना से श्रमिकों के बच्चों को काफी लाभ पहुंचने की उम्मीद है।


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