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महाराष्ट्र : 'महा-युति' और 'महा-अघाड़ी' के बीच महा-युद्ध

महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को हो रहे विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला महा-युति (महागठबंधन) और महा-अघाड़ी (महामोर्चा) के बीच है।

महाराष्ट्र : महा-युति और महा-अघाड़ी के बीच महा-युद्ध
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मुंबई । महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को हो रहे विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला महा-युति (महागठबंधन) और महा-अघाड़ी (महामोर्चा) के बीच है। जहां महा-युति में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिवसेना तथा चार अन्य छोटी पार्टियां शामिल हैं, वहीं महा-अघाड़ी में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) हैं।

जहां महा-युति ने विश्वास जताया है कि पिछले पांच साल के प्रदर्शन के आधार पर वह और ज्यादा बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी, वहीं महा-अघाड़ी यह बोलकर सत्तारूढ़ गठबंधन को हटाने के लिए सक्रिय है कि महा-युति हर मोर्चे पर असफल रही है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुआई में सत्तारूढ़ गठबंधन हाल ही में लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 48 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज करने के कारण खुश है।

इसके अलावा जहां भाजपा-शिवसेना गठबंधन में एकजुटता है, वहीं विपक्षी इससे मीलों दूर हैं।

वहीं प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) जैसी पार्टियां सभी 288 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं।

इसके अलावा राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे), आम आदमी पार्टी (आप) और विदर्भ संघर्ष समिति, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन समेत कई पार्टियां हैं, जो कई सीटों पर महा अघाड़ी और वीबीए जैसी पार्टियों के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं, जिससे विपक्ष का वोट बंटेगा।

कांग्रेस-राकांपा के लिए अभी सबसे बड़ी चुनौती सदन में अपनी वर्तमान संख्या को अगली विधानसभा में कायम रखना और वीबीए, मनसे और आप जैसी पार्टियों के लिए राज्य में अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता बनाना है।

विपक्ष को इस समय किसान, हालिया बाढ़ और कुछ हिस्सों में सूखा, महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था आदि के मुद्दों पर कथित सत्तारूढ़ गठबंधन विरोधी लहर का फायदा उठाने की उम्मीद है।

वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन अपने पक्ष में लहर मानते हुए अनुच्छेद 370 को खत्म करने के फैसले को देशभक्ति से जोड़ते हुए चुनावी प्रचार की योजना बना रहा है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की हालिया रैलियों में किया गया।

महा-युति में भाजपा, शिव सेना, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, विनायक मेते की शिव संग्राम, महादेव जनकर की राष्ट्रीय समाज पक्ष और सदाभाऊ खोत की रायत क्रांति संघटना शामिल हैं।

वहीं महा-अघाड़ी में कांग्रेस, राकांपा, जयंत पाटील की पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी, हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास अघाड़ी, राजू शेट्टी की स्वाभिमानी शेतकारी संघटना, जोगेंद्र कवाडे की पीपुल्स रिपब्लिकन पार्टी और समाजवादी पार्टी (सपा) शामिल हैं।


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