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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘उन्नत कृषि मेला’ को बताया सीखने का केंद्र, तकनीक आधारित खेती पर दिया जोर

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रायसेन में चल रहा कृषि मेला खेती में व्यावहारिक बदलाव लाने पर केंद्रित है, जहां किसानों को सीधे विज्ञान, तकनीक और बाजार से जोड़ा जा रहा है

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘उन्नत कृषि मेला’ को बताया सीखने का केंद्र, तकनीक आधारित खेती पर दिया जोर
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रायसेन। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि रायसेन में चल रहा कृषि मेला खेती में व्यावहारिक बदलाव लाने पर केंद्रित है, जहां किसानों को सीधे विज्ञान, तकनीक और बाजार से जोड़ा जा रहा है।

‘उन्नत कृषि मेला’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन एक “हैंड्स-ऑन लर्निंग प्लेटफॉर्म” के रूप में तैयार किया गया है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल बैठक या भाषण का मंच नहीं है, बल्कि ऐसा मेला है जिसे एक स्कूल की तरह बनाया गया है, जहां किसान वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों से सीधे सीखेंगे।

11 से 13 अप्रैल तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर से हजारों किसान, वैज्ञानिक, एग्री-स्टार्टअप्स और विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।

मेले में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें कृषि, बागवानी, सिंचाई, मशीनीकरण, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी नई तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में चौहान ने बताया कि मध्य प्रदेश के 4,000 से अधिक किसानों ने मेले के दौरान नई कृषि तकनीकों के लाइव डेमोंस्ट्रेशन के लिए पंजीकरण कराया है।

उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 20 विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

किसानों की आय बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर विविधीकरण अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने समझाया कि एक या दो एकड़ जमीन पर भी किसान एकीकृत खेती अपनाकर सालाना 2 लाख रुपये से अधिक कमा सकते हैं, जिसमें फसलों के साथ बागवानी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और पोल्ट्री शामिल है।

किसानों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए किसान भगवान के समान हैं और उनकी सेवा करना पूजा के बराबर है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ किसानों की आजीविका सुधारना सरकार की प्राथमिकता बताया।

चौहान ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राज्य-विशिष्ट कृषि रोडमैप तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि हर राज्य की मिट्टी और परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए हर राज्य के लिए अलग कृषि मॉडल तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जैसे जिलों के लिए पहले ही रोडमैप तैयार किया जा चुका है, जिससे किसानों को उपयुक्त फसल और आधुनिक तरीकों की जानकारी मिल सके।

उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में, इसे जमीन पर लागू करना सुनिश्चित करेंगी और वास्तविक बदलाव लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

बाजार समर्थन को बेहतर बनाने के लिए मंत्री ने घोषणा की कि राज्य में 55 दाल मिलें स्थापित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार मसूर, उड़द और तुअर की पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदेगी।

तकनीक और वैल्यू एडिशन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि ‘मृदा/ई-फार्म’ जैसे उपकरणों की मदद से किसान मिट्टी की सेहत का आकलन कर लागत कम कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण से जुड़कर किसान अपनी आय में और वृद्धि कर सकते हैं।


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