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उज्जैन: महाकाल के दरबार पहुंचे भाजपा सांसद मनोज तिवारी, देश की खुशहाली की कामना

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने अपने परिवार के साथ विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, जलाभिषेक किया

उज्जैन: महाकाल के दरबार पहुंचे भाजपा सांसद मनोज तिवारी, देश की खुशहाली की कामना
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उज्जैन। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने शुक्रवार को अपने परिवार के साथ विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, जलाभिषेक किया। साथ ही, देश की सुख-समृद्धि और नागरिकों के कल्याण की प्रार्थना की। दर्शन के बाद उन्होंने अपनी आध्यात्मिक अनुभूति साझा करते हुए कहा कि महाकाल की कृपा से उनका मन अत्यंत प्रसन्न है और उन्होंने सभी श्रद्धालुओं पर भगवान महाकाल का आशीर्वाद बने रहने की कामना की।

मनोज तिवारी ने कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन में दर्शन करना उनके लिए अत्यंत आनंद का विषय है। उन्होंने कहा कि बड़ा आनंद है, हमने महाकाल के दर्शन किए हैं। महाकाल भस्म के लिए प्रसिद्ध हैं और हमें भस्म भी लगाने का सौभाग्य मिला। हमने जलधारा अर्पित की। सब कुछ बेहद दिव्य रहा। मन बहुत प्रसन्न है। मैं सपरिवार यहां आया हूं और यही प्रार्थना है कि महाकाल की कृपा हमारे देश पर बनी रहे, देश निरंतर प्रगति करे और देशवासी सदैव खुशहाल रहें।

उन्होंने आगे कहा कि जो भी श्रद्धालु भगवान महाकाल के प्रति आस्था रखते हैं, चाहे वे स्वयं मंदिर आकर दर्शन करें या दूर से ही श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें, उन सभी पर भगवान महाकाल की कृपा बनी रहे। उन्होंने कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी प्रार्थना है।

इस दौरान कांवड़ यात्रा को लेकर मौलाना साजिद रशीदी के विवादित बयान पर मनोज तिवारी ने तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सोच राक्षसी प्रवृत्ति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि महादेव को भी अनेक राक्षसों का संहार करना पड़ा था। पौराणिक इतिहास पढ़िए, हर युग में राक्षस रहे हैं। जो लोग कांवड़ियों पर सवाल उठाते हैं या उनके बारे में अपमानजनक बयान देते हैं, वे उसी राक्षसी प्रवृत्ति के लोग हैं। महाकाल के पास सबका इलाज है।

हालांकि, इसके साथ ही मनोज तिवारी ने सभी धर्मों और आस्थाओं के सम्मान की भी अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान महाकाल का संदेश किसी भी व्यक्ति की आस्था का अपमान करना नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और पंथ का पालन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी दूसरे धर्म, उसकी पूजा-पद्धति, साधना, योग या कांवड़ यात्रा जैसी धार्मिक परंपराओं का अनादर नहीं करना चाहिए। जो लोग दूसरों की धार्मिक आस्था के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हैं, वे समाज में सौहार्द की भावना को कमजोर करते हैं।


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