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मध्य प्रदेश में स्कूलों की दयनीय स्थिति पर कांग्रेस ने चिंता जताई

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला दिया और राज्य की शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को प्रमाणित किया

मध्य प्रदेश में स्कूलों की दयनीय स्थिति पर कांग्रेस ने चिंता जताई
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भोपाल। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह ने रविवार को मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए नीति आयोग की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला दिया और राज्य की शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को प्रमाणित किया।

भोपाल में बोलते हुए सिंह ने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्षों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के 'अभ्युदय मध्य प्रदेश' के दावों की पोल खोल दी है।

स्थिति को चिंताजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के युग में भी मध्य प्रदेश के लगभग 13,500 स्कूल बिना बिजली के चल रहे हैं, जिससे कक्षाएं पूरी तरह अंधेरे में डूबी रहती हैं। सिंह ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर भी चिंता व्यक्त की और बताया कि राज्य के लगभग 2,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और 'नारी वंदन' जैसे नारों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है।

राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए सिंह ने पूछा कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में युवा लड़कियों से शिक्षा जारी रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

रिपोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भी भारी कमी है।

उनके अनुसार, राज्य भर के स्कूलों में 52,000 से अधिक पद रिक्त हैं, जिनमें प्राथमिक विद्यालयों में 45,000 से अधिक शिक्षण पद शामिल हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में 7,000 से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के साथ चल रहे हैं।

सिंह ने सरकार से जवाबदेही की मांग की और सवाल उठाया कि जब स्कूलों में कर्मचारियों और उपकरणों की कमी बनी हुई है, तो शिक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित भारी धनराशि कहां खर्च की जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि लगभग 33 लाख बच्चों ने प्राथमिक शिक्षा बीच में ही छोड़ दी है, जिसे उन्होंने खराब बुनियादी ढांचे और अपर्याप्त सुविधाओं का सीधा परिणाम बताया।


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