मध्य प्रदेश में ‘स्वच्छ जल अभियान’ की शुरुआत हर घर तक पहुंचेगा सुरक्षित पेयजल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विदिशा और सागर जिलों के दौरे से लौटते ही भोपाल एयरपोर्ट पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण बैठक ली

सीएम मोहन यादव बोले दूषित पानी की सप्लाई किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं
- दो चरणों में चलेगा अभियान जीआईएस मैपिंग और रोबोट से होगी पाइपलाइन जांच
- हर मंगलवार होगी ‘जल सुनवाई’ जनता की शिकायतों का होगा त्वरित निराकरण
- इंदौर हादसे के बाद सख्त निर्देश लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विदिशा और सागर जिलों के दौरे से लौटते ही भोपाल एयरपोर्ट पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने राज्यव्यापी ‘स्वच्छ जल अभियान’ का शुभारंभ किया, जो 10 जनवरी से शुरू हो गया है। यह अभियान जल सुरक्षा, जल संरक्षण और जल सुनवाई के महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों पर केंद्रित है।
बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल सहित सभी महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, कमिश्नर, कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर, जिला पंचायत सीईओ और नगरीय-ग्रामीण क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हर घर तक साफ जल पहुंचे। तकनीक का उपयोग करते हुए पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे। किसी भी स्थिति में दूषित पेयजल सप्लाई नहीं होनी चाहिए।
स्वच्छ जल अभियान दो चरणों में, 10 जनवरी से 28 फरवरी और 1 मार्च से 31 मई तक, चलेगा। अभियान के कई प्रमुख बिंदु हैं, जिनमें जल शोधन यंत्रों और पेयजल संग्रहण टंकियों की सफाई, जीआईएस मैप आधारित एप से निगरानी, पेयजल पाइपलाइन में दूषित मिश्रण रोकने की कार्रवाई, जीआईएस मैप पर वाटर और सीवेज पाइपलाइन की मैपिंग, इंटर-पाइंट सेक्शन का चिन्हांकन और लीकेज जांच, रोबोट से पाइपलाइन लीकेज की जांच और सभी पेयजल स्रोतों का गुणवत्ता परीक्षण शामिल हैं।
इनके अलावा एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की नियमित निगरानी, हर मंगलवार ‘जल सुनवाई’ का आयोजन, जहां आम जनता को पेयजल संबंधी शिकायतों के लिए सुनवाई का अधिकार मिलेगा, 181 हेल्पलाइन पर विशेष व्यवस्था से शिकायत दर्ज और शिकायतों का समयसीमा में निराकरण और आवेदक को सूचित करना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच हो, दूषित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों से नागरिकों को साफ पानी उपलब्ध कराना सुनिश्चित होगा। अभियान में जन जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया जाएगा।
यह अभियान हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों के बाद और अधिक प्रासंगिक हो गया है, जहां कई लोगों की जान गई और हजारों प्रभावित हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा, "बड़ी चुनौती है, लेकिन गंभीरता से सामना करेंगे और देश में एक आदर्श प्रस्तुत करेंगे।" लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।


