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पति की हनीमून पर हत्‍या करने वाली सोनम रघुवंशी को जमानत, पुलिस जांच पर अदालत की सख्त टिप्पणी

न्यायालय ने पाया कि सोनम की गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए गए थे। दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं था, जो इस तरह के गंभीर अपराध में जरूरी माना जाता है।

पति की हनीमून पर हत्‍या करने वाली सोनम रघुवंशी को जमानत, पुलिस जांच पर अदालत की सख्त टिप्पणी
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इंदौर/शिलांग : बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मेघालय की राजधानी शिलांग की सत्र अदालत ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी (25) को जमानत दे दी है। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ सख्त शर्तें भी लगाई हैं, जिनके तहत सोनम बिना न्यायालय की अनुमति शिलांग की सीमा नहीं छोड़ सकेगी और हर सुनवाई में उसकी उपस्थिति अनिवार्य होगी। करीब 10 महीने से जेल में बंद सोनम की रिहाई अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संभव मानी जा रही है।

जमानत की प्रमुख शर्तें

अदालत ने सोनम को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर जमानत दी है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि वह किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगी और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगी। उसे पुलिस जांच में पूरा सहयोग देना होगा। अदालत ने चेतावनी दी है कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

इस मामले में अदालत ने पुलिस जांच और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने पाया कि सोनम की गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए गए थे। दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं था, जो इस तरह के गंभीर अपराध में जरूरी माना जाता है। अदालत के अनुसार, गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देने से आरोपी अपने बचाव की उचित तैयारी नहीं कर सका, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य है। यदि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती है, तो गंभीर अपराधों में भी जमानत दी जा सकती है। यह टिप्पणी पुलिस की प्रक्रिया पर सीधा सवाल खड़ा करती है और न्यायिक मानकों की महत्ता को रेखांकित करती है।

जांच में सुस्ती भी बनी वजह

जमानत देने के पीछे एक बड़ा कारण पुलिस जांच में धीमी प्रगति भी रही। अदालत ने पाया कि इस मामले में कुल 90 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल चार के ही बयान दर्ज किए जा सके हैं। इसके अलावा सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल होने के कारण सुनवाई भी प्रभावित हुई। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी को अनिश्चित समय तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब जांच और ट्रायल की प्रक्रिया धीमी हो।

परिवार की प्रतिक्रिया

सोनम को जमानत मिलने से मृतक राजा रघुवंशी के परिवार में निराशा देखी जा रही है। परिजनों का कहना है कि यह फैसला उनके लिए झटका है और उन्हें न्याय मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला साल 2025 में सामने आया था, जब इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी और सोनम की शादी 11 मई को हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद 21 मई को दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए। 23 मई को चेरापूंजी इलाके से दोनों के अचानक लापता होने की खबर आई, जिसने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया। करीब 10 दिन बाद राजा रघुवंशी का शव 30 फीट गहरी खाई से बरामद हुआ। शव पर धारदार हथियार के निशान पाए गए थे, जिससे हत्या की पुष्टि हुई। शुरुआती जांच में इसे लूटपाट से जुड़ा मामला माना गया, लेकिन सोनम का गायब होना जांच को नया मोड़ दे गया।

साजिश का पुलिस दावा

घटना के कुछ दिनों बाद, 9 जून को सोनम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक ढाबे पर संदिग्ध हालत में मिली। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर शिलांग पहुंचाया। जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी और नौकर राज कुशवाह के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची थी। पुलिस के अनुसार, तीन सुपारी किलर विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को हत्या के लिए लगाया गया था, जिन्होंने वारदात को अंजाम देकर शव को खाई में फेंक दिया।

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