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प्रोजेक्ट चीता बना दुनिया का सबसे सफल वन्यजीव अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश में संचालित ‘प्रोजेक्ट चीता’ विश्व का सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियान बनकर उभरा है

प्रोजेक्ट चीता बना दुनिया का सबसे सफल वन्यजीव अभियान
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कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की सफल वापसी, 27 शावक जीवित

  • मुखी और गामिनी बनीं माँ, भारतीय पारिस्थितिकी में नई उम्मीद
  • चीता मित्र अभियान: 450 से अधिक लोग जुड़े, रोजगार भी मिला
  • मोहन यादव का ऐलान: 2032 तक 70 चीतों की आबादी का लक्ष्य

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश में संचालित ‘प्रोजेक्ट चीता’ विश्व का सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियान बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी 2026 को बोत्स्वाना से 8 और चीते प्रदेश लाए जाएंगे। यह परियोजना ‘प्रकृति से प्रगति’ का संदेश देती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में विलुप्त हो चुके चीतों की वापसी का ऐतिहासिक प्रयास ‘प्रोजेक्ट चीता’ अब स्थायी स्थापना और प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुका है। सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए। वर्तमान में कूनो और गांधी सागर अभयारण्य में चीते सफलतापूर्वक अनुकूलित हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीकी और नामीबियाई मादाओं से जन्मे कई शावक स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा ‘मुखी’ ने भी 5 शावकों को जन्म दिया है। ‘गामिनी’ दूसरी बार माँ बनी है, जबकि ‘वीरा’ और ‘निर्वा’ अपने शावकों के साथ सुरक्षित हैं। वर्ष 2023 से 2026 के बीच कूनो में कुल 39 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 27 वर्तमान में स्वस्थ और जीवित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ ने वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा है। 450 से अधिक ‘चीता मित्र’ तैयार किए गए हैं और सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2032 तक लगभग 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60 से 70 चीतों की आत्मनिर्भर आबादी स्थापित करना है। इसके लिए गुजरात के बन्नी घास के मैदानों में संरक्षण प्रजनन केंद्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में आई चुनौतियों के बावजूद चीतों ने भारतीय पारिस्थितिकी में स्वयं को ढाल लिया है, जो इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता का संकेत है।


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