MP में राज्यसभा की तीसरी सीट पर भी चुनाव लड़ेगी BJP, महेश केवट को बनाया उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी सीट के लिए भी अपना प्रत्याशी उतारने का फैसला करते हुए मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। महेश केवट निवाड़ी जिले के रहने वाले हैं और पिछड़ा वर्ग से आते हैं।

भोपाल : Madhya Pradesh Rajya Sabha Elections: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी ने तीसरी सीट के लिए भी अपना प्रत्याशी उतारने का फैसला करते हुए मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। महेश केवट निवाड़ी जिले के रहने वाले हैं और पिछड़ा वर्ग से आते हैं। उनके नाम की घोषणा के साथ ही यह साफ हो गया है कि राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए अब निर्विरोध निर्वाचन नहीं होगा, बल्कि मुकाबला चुनाव के जरिए तय होगा। भाजपा के इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और कांग्रेस के लिए भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।
देर रात तक चली बैठक में बनी रणनीति
राज्यसभा चुनाव को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर भाजपा के शीर्ष नेताओं की लंबी बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने को लेकर सहमति बनाई और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और आदिवासी महिला उम्मीदवारों के नामों पर भी विचार किया गया। अंततः मछुआ समुदाय से आने वाले महेश केवट के नाम पर सहमति बनी और देर रात उनकी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी गई।
मछुआ समाज को साधने की रणनीति
भाजपा के इस फैसले को सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी लंबे समय से विभिन्न वर्गों और समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने पिछड़ा वर्ग और विशेष रूप से मछुआ समाज को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा सामाजिक प्रतिनिधित्व के जरिए अपने जनाधार को और मजबूत करना चाहती है।
कांग्रेस खेमे में बढ़ी चिंता
भाजपा द्वारा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने के बाद कांग्रेस के सामने चुनौती बढ़ गई है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। कांग्रेस के पास कुल 64 विधायक हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण उसकी स्थिति उतनी मजबूत नहीं मानी जा रही। श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाई कोर्ट की रोक लगी हुई है। वहीं, बीना से विधायक निर्मला सप्रे को लेकर कांग्रेस का आरोप है कि वह भाजपा के साथ हैं। उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए मामला अदालत में लंबित है। ऐसे में कांग्रेस के प्रभावी विधायकों की संख्या 62 मानी जा रही है, जो आवश्यक संख्या से केवल चार अधिक है।
विधायकों की बाड़बंदी की तैयारी
राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रही है। पार्टी को क्रॉस वोटिंग की आशंका है, इसलिए विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें दूसरे राज्य, विशेषकर कर्नाटक भेजने का विकल्प भी विचार कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत तय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उम्मीदवार पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगा और जीत हासिल करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि चुनाव में लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन हुआ तो कांग्रेस उसका जवाब देने के लिए तैयार है।
भाजपा का गणित क्या कहता है?
विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं। इनमें से 116 वोटों के सहारे पार्टी अपने दो उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित कर सकती है। इसके बाद उसके पास 48 वोट अतिरिक्त बचते हैं। यदि बीना विधायक निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश डोडियार का समर्थन भी भाजपा को मिलता है, तो यह संख्या 50 तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद तीसरी सीट जीतने के लिए भाजपा को आठ और मतों की आवश्यकता होगी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पार्टी इसके लिए विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है।
आज नामांकन दाखिल करेंगी मीनाक्षी नटराजन
कांग्रेस की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाई गईं मीनाक्षी नटराजन सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। इससे पहले उन्होंने भोपाल में वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और वरिष्ठ नेता अजय सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। इन बैठकों में राज्यसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरण और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
तीसरी सीट पर नजरें टिकीं
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट अब राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बनती जा रही है। भाजपा जहां अपनी संख्या और रणनीति के दम पर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखकर जीत सुनिश्चित करने में जुटी है। आने वाले दिनों में यह चुनाव प्रदेश की राजनीति में नई हलचल और कई नए समीकरण पैदा कर सकता है।


