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भोपाल में किसान आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, सरकार से वार्ता बेनतीजा; आज सीएम आवास कूच की तैयारी

मूंग की 100% सरकारी खरीदी, MSP की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर राजधानी में डटे किसान; सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, ट्रैफिक डायवर्ट।

भोपाल में किसान आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, सरकार से वार्ता बेनतीजा; आज सीएम आवास कूच की तैयारी
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भोपाल: Bhopal Farmers Protest: मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। राजधानी भोपाल में देर रात प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बातचीत विफल रहने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। आंदोलन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि कई स्कूलों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा और संभावित यातायात बाधा को देखते हुए अवकाश घोषित कर दिया है।

पैदल मार्च कर राजधानी पहुंचे किसान

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे। प्रदर्शनकारी बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने नर्मदापुरम रोड पर धरने पर बैठ गए हैं। यात्रा के दौरान किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए तीन बैरिकेड पार किए, लेकिन पूरे आंदोलन में कहीं भी हिंसा या टकराव की स्थिति नहीं बनी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है और प्रशासन लगातार किसान नेताओं के संपर्क में है।

मूंग खरीदी बना आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा

इस आंदोलन की सबसे बड़ी मांग ग्रीष्मकालीन मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी है। किसानों का कहना है कि सीमित सरकारी खरीद के कारण बड़ी मात्रा में उपज खुले बाजार में समर्थन मूल्य से कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी उपज की पूरी खरीद सुनिश्चित नहीं होती और लंबित मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

केंद्र से खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग

इस बीच मध्य प्रदेश सरकार ने भी केंद्र सरकार से मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने 14 मई और 3 जुलाई को केंद्र को भेजे प्रस्ताव में 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने की अनुमति मांगी थी। हालांकि केंद्र की ओर से फिलहाल केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य स्वीकृत किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार इस वर्ष प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती लगभग 14.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। अनुमानित औसत उत्पादकता 1410 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जिसके आधार पर कुल उत्पादन करीब 20.16 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है। इनमें से लगभग 8 लाख मीट्रिक टन मूंग सरकारी खरीद के लिए उपलब्ध मानी जा रही है। अब तक 3.47 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन केवल 82 हजार किसानों से ही खरीद पूरी हो सकी है।

किसानों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे पहले मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद सुनिश्चित करना, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देना, किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना, अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को रद्द करना तथा किसानों से जुड़े सरकारी वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना शामिल है। इसके अलावा किसान खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाने, भुगतान में हो रही देरी समाप्त करने, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों के लिए पर्याप्त मुआवजा देने की भी मांग कर रहे हैं।

आज मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच की तैयारी

किसान संगठनों ने घोषणा की है कि नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और सीहोर सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में किसान बुधवार को भोपाल पहुंचेंगे। इसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का भी ऐलान किया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि नर्मदापुरम के बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पदयात्रा राजधानी तक पहुंच चुकी है और हजारों किसान अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करेंगे और सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

धरनास्थल पर स्वयं बना रहे भोजन

आंदोलन की लंबी तैयारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि किसान धरनास्थल पर ही सामूहिक रूप से भोजन तैयार कर रहे हैं। कई स्थानों पर किसान स्वयं दाल-बाटी और अन्य भोजन बनाते नजर आए। उनका कहना है कि वे लंबे संघर्ष के लिए तैयार हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।

स्कूल बंद, ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव

आंदोलन का असर राजधानी की यातायात व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों पर भी दिखाई दिया। नर्मदापुरम रोड और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कई स्कूलों ने विद्यार्थियों की सुरक्षा तथा संभावित ट्रैफिक जाम को देखते हुए बुधवार को अवकाश घोषित कर दिया। पुलिस ने कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है और लोगों से वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की अपील की है।

पुलिस बोली- प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण

मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि किसान आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर किसी प्रकार का बल प्रयोग या लाठीचार्ज नहीं किया गया है। प्रशासन और किसान नेताओं के बीच संवाद जारी है तथा सरकार उनकी मांगों पर चर्चा कर रही है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है, ताकि आम नागरिकों को कम से कम असुविधा हो और आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होता रहे।


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