Top
Begin typing your search above and press return to search.

भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में 10 साल तक कागजों में चलता रहा बीएड कॉलेज, अब सेवानिवृत्त जज करेंगे जांच

निरीक्षण टीम को विदिशा रोड स्थित ग्राम मुगलिया कोट में संचालित बताए गए श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन का कोई संचालन स्थल नहीं मिला। विश्वविद्यालय के दस्तावेजों में यह संस्थान वर्षों से संबद्ध दर्ज है, लेकिन मौके पर कॉलेज का भवन या शैक्षणिक गतिविधियां नहीं मिलीं।

भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में 10 साल तक कागजों में चलता रहा बीएड कॉलेज, अब सेवानिवृत्त जज करेंगे जांच
X

भोपाल: मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) से संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। नए शैक्षणिक सत्र के लिए संबद्धता और निरंतरता प्राप्त करने के उद्देश्य से 127 निजी बीएड कॉलेजों ने आवेदन किया था। विश्वविद्यालय द्वारा कराए गए निरीक्षण में कई संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। सबसे चौंकाने वाला मामला उस कॉलेज का है, जो विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में पिछले लगभग दस वर्षों से संबद्ध है, लेकिन निरीक्षण के दौरान उसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं मिला। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की निरीक्षण व्यवस्था, संबद्धता प्रक्रिया और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की निगरानी प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

दस साल से रिकॉर्ड में मौजूद, लेकिन मौके पर नहीं मिला कॉलेज

निरीक्षण टीम को विदिशा रोड स्थित ग्राम मुगलिया कोट में संचालित बताए गए श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन का कोई संचालन स्थल नहीं मिला। विश्वविद्यालय के दस्तावेजों में यह संस्थान वर्षों से संबद्ध दर्ज है, लेकिन मौके पर कॉलेज का भवन या शैक्षणिक गतिविधियां नहीं मिलीं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह संस्थान केवल कागजों पर संचालित हो रहा था। अधिकारियों के अनुसार, एक अन्य संस्थान के संबंध में भी इसी प्रकार की स्थिति सामने आई है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

116 कॉलेजों की जांच अब सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे

मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 जुलाई को आयोजित विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (ईसी) की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। परिषद ने 116 निजी बीएड कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की अनुशंसा की है। जांच का दायरा केवल संस्थानों की भौतिक स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि किन मामलों में बिना निरीक्षण के कॉलेजों को राहत दी गई या उनकी प्रोफाइल कार्यपरिषद की अंतिम मंजूरी से पहले ही विश्वविद्यालय के ई-पोर्टल पर ‘ओके’ कर अपलोड कर दी गई। इससे पूरी संबद्धता प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।

निरीक्षण में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं

विश्वविद्यालय द्वारा गठित निरीक्षण दल की रिपोर्ट में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार कई कॉलेजों में आधारभूत सुविधाओं की भारी कमी पाई गई। पांच संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं दर्ज की गईं, दो कॉलेज मौके पर अस्तित्व में ही नहीं मिले, जबकि तीन संस्थान निर्धारित पते के बजाय अन्य स्थानों पर संचालित पाए गए। इन निष्कर्षों के बावजूद 24 जून को कार्यपरिषद ने शपथ-पत्र के आधार पर 125 कॉलेजों को सशर्त संबद्धता और निरंतरता प्रदान कर दी थी। अब यही निर्णय विवाद के केंद्र में है और इसकी भी जांच की जाएगी।

सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत से खुला मामला

पूरे मामले की शुरुआत सामाजिक कार्यकर्ता भगवान सिंह राजपूत की शिकायत से हुई। उन्होंने मार्च में उच्च शिक्षा विभाग, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को शिकायत भेजकर श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन की वैधता पर सवाल उठाए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिस भूमि पर कॉलेज संचालित होना बताया गया है, वहां वर्षों से खेती हो रही है और कॉलेज केवल दस्तावेजों में मौजूद है। शिकायतकर्ता ने पिछले दस वर्षों के निरीक्षण प्रतिवेदन, संबद्धता आदेश, एनसीटीई की मान्यता, प्रवेश रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने दोषी अधिकारियों और संस्था संचालकों के खिलाफ भ्रष्टाचार, जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है।

एक ही पते पर दो कॉलेज मिलने से बढ़ा संदेह

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि एचएल अग्रवाल बीएड कॉलेज और एचएल अग्रवाल कॉलेज ऑफ एजुकेशन, इटारसी एक ही पते पर संचालित दर्शाए गए हैं। निरीक्षण दल को निर्धारित स्थान पर संबंधित भवन तक नहीं मिला। इस खुलासे ने विश्वविद्यालय की निरीक्षण प्रणाली और दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

कई अन्य संस्थानों में भी मिलीं खामियां

जांच रिपोर्ट के अनुसार कई अन्य निजी बीएड संस्थानों में भी गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं। इनमें दीक्षा महाविद्यालय, एडीएस महाविद्यालय, बोनीफाई कॉलेज, भोपाल डिग्री कॉलेज, डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्मृति महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कॉलेज, मिलेनियम कॉलेज ऑफ एजुकेशन, श्री द्वारिका प्रसाद यादव महाविद्यालय और तक्षशिला महाविद्यालय सहित कई संस्थान शामिल हैं। इन कॉलेजों में भवन, शैक्षणिक संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और अन्य निर्धारित मानकों से जुड़ी कमियों की ओर निरीक्षण दल ने ध्यान दिलाया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी जांच की पुष्टि

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलसचिव समर बहादुर सिंह ने बताया कि संबद्धता और निरंतरता के लिए कुल 127 कॉलेजों ने आवेदन किया था। इनमें से 125 संस्थानों को कार्यपरिषद ने सशर्त संबद्धता प्रदान की थी। हालांकि निरीक्षण रिपोर्ट और सामने आई शिकायतों को देखते हुए अब 116 कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया की विस्तृत जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की अनुशंसा की गई है।

उच्च शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे सवाल

यह मामला केवल कुछ निजी बीएड कॉलेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों की मान्यता और संबद्धता प्रणाली की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो विश्वविद्यालय की निरीक्षण प्रक्रिया, एनसीटीई की निगरानी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी व्यापक समीक्षा हो सकती है। आने वाले दिनों में न्यायिक जांच की रिपोर्ट इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने और उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it