लोस-विस चुनाव साथ कराने के पीछे राजनीतिक चाल : येचुरी
रायपुर ! भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा है कि देश में लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के पीछे राजनीतिक चाल है।

रायपुर ! भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा है कि देश में लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के पीछे राजनीतिक चाल है। नोटबंदी के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरी तरह फेल हैं। यह आर्थिक आपातकाल है। आने वाले दिनां में जनता की परेशानियां और बढ़ेगी। मार्च में होली के बाद सभी राजनीतिक दलों को एकजुट कर देशभर में जन आंदोलन खड़ा करेंगे। लोकसभा का बजट सत्र चले। मुद्दों पर सार्थक बहस हो, हम यह चाहते हैं। नोटबंदी को षडयंत्र बताते हुए कहा इसके पीछ असली मकसद बड़े उद्योगपतियों व पूंजीपतियोंं को बचाना है। जो बैंकों का पैसा वापस नहीं कर रहे हैं।
माकपा प्रदेश इकाई के सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे श्री येचुरी गुरुवार को रायपुर में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अच्छे इवेन्ट मैनेजर हैं। पहले उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान, स्किल इंडिया सर्जिकल स्ट्राइक और अब नोटबंदी लागू कर जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटका रहे हैं। नोटबंदी लागू करने के पीछे चार कारण कालाधन पर रोक, भ्रष्टाचार पर अंकुश, आतंकवादी घटनाओं को रोकने तथा नकली नोट को चलन से बाहर करना था। इनमें से एक भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है। चारों मुद्दों पर मोदी फेलल हुए हैं। इसलिए अब कैशलेश की बात कर रहे हैं। 50 दिनों के बाद भी लोग अपनी रकम बैंक से नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी का उल्टा असर हुआ है। यह आय जनता पर आर्थिक हमला है। इससे लाखों लोग बेरोजगार हो गए। सभी वर्ग पर इसकी मार पड़ी है। इसके खिलाफ माकपा मार्च मेें होली के बाद गरीब किसान, मजदूर के अलावा सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन करेगी।
श्री येचुरी ने कहा 50 दिनों में बैंकों में 97 प्रतिशत हजार व पांच सौ के पुराने नोट जमा हो गए हैं। सारा कालाधन सफेद हो गया है। आतंकवाद कम होने की बजाय दोगुना अधिक जवान शहीद हुए हैं। नोटबंदी के पीछे छिपे कारणों का खुलासा करते हुए उन्होंने कहा देश में बैंकों का खजाना खाली हो गया है। उन्हें बचाने आम जनता का पैसा बैंकों में जमा करवा दिया गया। सरकार ने पूंजीपतियों का एक लाख हजार करोड़ रुपए कर्जा माफ कर दिया। लेकिन नोटबंदी से बर्बाद हुए किसानों का कर्जा माफ नहीं किया जा रहा है। देश में जीडीपी की दर लगातार गिर रही है। उत्पादन ठप्प हो गया है। बेरोजगारी बढ़ी है। इससे जनता का ध्यान भटकाने, कैशलेस इकोनामी की बात प्रधानमंत्री कर रहे हैं। उन्होंने कहा यदि मोदी राजनीतिक भ्रष्टाचार समाप्त करना चाहते हैं तो औद्योगिक घरानोंं द्वारा दिए जाने वाले चंदे पर रोक लगाी चाहिए। राजनैतिक दलों के लिए भी चुनावी खर्च की सीमा तय की जाए। 1 फरवरी से प्रारंभ हो रहे संसद के बजट सत्र को लेकर कहा हमारी मंशा है शोर-शराबे के बिना चले और मुद्दों पर सार्थक बहस होनी चाहिए। लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे पर उन्होंने कहा इसके पीछे राजनीतिक चाल है। अब तक 300 से अधिक बार धारा 350 का दुरुपयोग किया गया है। दोनों चुनावों में जनता की अलग-अलग पसंद होती है। कई बार मिलीजुली सरकार आती है। ऐसी स्थिति में क्या प्रधानमंत्री धारा 356 को हटाने तैयार है। अन्यथा इसके दुरुपयोग की संभावना बनी रहेगी।


