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लॉकडाउन के कारण लोगों की आय पर पड़ा भारी नकारात्मक प्रभाव

कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए लागू किए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद से परिवारों की आय पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ा

लॉकडाउन के कारण लोगों की आय पर पड़ा भारी नकारात्मक प्रभाव
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नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए लागू किए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद से परिवारों की आय पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आईएएनएस सीवोटर इकोनॉमिक बैटरी वेव सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है, जहां आधे से अधिक उत्तरदाताओं ने इसका संकेत दिया है। सर्वेक्षण के अनुसार, 53.2 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि उनकी आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सर्वे में यह देखने को मिला है कि लोगों को या तो अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है, या वे पहले की अपेक्षा कम वेतन प्राप्त कर रहे हैं या उन्हें बिना वेतन के छुट्टी पर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे भी लोग हैं, जो अंशकालिक (पार्ट टाइम) काम करने पर मजबूर हैं।

इसी तरह, 56.4 प्रतिशत महिलाएं राष्ट्रव्यापी बंद से पहले की तुलना में कम कमाई कर रही हैं।

यह सर्वे जून के पहले सप्ताह में किया गया है, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि से आने वाले 1,397 लोगों से बातचीत की गई है। यह सर्वे देश भर में 500 से अधिक लोकसभा सीटों के अंतर्गत आने वाले लोगों के बीच किया गया है। सर्वे में साप्ताहिक तौर पर 1,000 से अधिक उत्तरदाताओं से बातचीत की गई है।

आयु समूहों के हिसाब से किए गए इस सर्वे में सामने आया है कि 61.6 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिकों ने माना कि वे अब कम आय प्राप्त कर रहे हैं।

इसके साथ ही निम्न-आय समूह और उच्च-आय समूह दोनों ही प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव एचआईजी समूह पर पड़ा है, जहां 84.4 प्रतिशत लोगों को तकलीफ उठानी पड़ी है। यह प्रभाव व्यापार और वाणिज्य क्षेत्र में भी हो सकता है, जहां व्यावसायिक गतिविधि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

दिलचस्प बात यह है कि उच्च शिक्षा वाले लोग इस अनिश्चित और अस्थिर वातावरण में भी स्थिर लग रहे हैं।

उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले केवल 25.3 प्रतिशत महसूस कर रहे हैं कि वे कम आय प्राप्त कर रहे हैं।

धार्मिक तौर पर देखा जाए तो सबसे अधिक 79.5 प्रतिशत सिख समुदाय के लोगों ने माना कि वे इस दौरान कम आय प्राप्त कर रहे हैं। यानी इस समुदाय पर इसके सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव देखने को मिले हैं।

अगर क्षेत्र के आधार पर देखें तो दक्षिण में सबसे अधिक 69.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि आय के मामले में वे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, वहीं पश्चिम क्षेत्र के 55.4 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।


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