Top
Begin typing your search above and press return to search.

वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की दुनिया भर में निंदा, जानें चीन और रूस ने क्‍या कहा, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप

अमेरिका की कार्रवाई पर सबसे पहले और कड़ी प्रतिक्रिया चीन की ओर से आई। चीन ने कहा कि वह एक संप्रभु देश और उसके राष्ट्रपति के खिलाफ बल प्रयोग से बेहद हैरान है और इसकी कड़ी निंदा करता है।

वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की दुनिया भर में निंदा, जानें  चीन और रूस ने क्‍या कहा, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप
X
काराकस/वॉशिंगटन। वेनेजुएला की राजधानी काराकस और उसके आसपास के इलाकों में हुए जोरदार धमाकों के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के लिए की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर दुनिया भर में तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।वेनेजुएला सरकार ने अमेरिका पर सीधे सैन्य आक्रामकता का गंभीर आरोप लगाते हुए उसकी कड़ी निंदा की है। सरकार का कहना है कि अमेरिका ने न केवल वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन किया है, बल्कि यह कदम पूरे लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है। इस घटनाक्रम के बाद चीन, रूस, ब्राजील, ईरान, मैक्सिको और यूरोपीय संघ समेत कई देशों और संगठनों ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है।

वेनेजुएला सरकार का आरोप: संप्रभुता पर सीधा हमला
वेनेजुएला के संचार मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राजधानी कराकस के साथ-साथ मिरांडा, अरागुआ और ला गुएरा राज्यों में नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। सरकार के अनुसार, ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1 और 2 का खुला उल्लंघन हैं, जो किसी भी देश की संप्रभुता, राजनीतिक स्वतंत्रता और बल प्रयोग पर रोक से संबंधित हैं।

बयान में कहा गया, “यह कार्रवाई वेनेजुएला की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून को ताक पर रखकर एक संप्रभु देश के खिलाफ सैन्य बल का प्रयोग किया है।”

रक्षा मंत्री का सख्त संदेश: न समर्पण, न बातचीत
वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने इस मामले में बेहद कठोर रुख अपनाते हुए कहा कि देश न तो अमेरिका के आगे समर्पण करेगा और न ही दबाव में आकर बातचीत करेगा। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी बाहरी आक्रमण का जवाब देने के लिए तैयार हैं। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमने दो शताब्दियों से अधिक समय तक अपनी संप्रभुता की रक्षा की है। यह संघर्ष केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे वेनेजुएला की अस्मिता और स्वतंत्रता का है।”

तेल और खनिजों पर नजर का आरोप
सरकार ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि यह कथित हमला वेनेजुएला के रणनीतिक संसाधनों विशेष रूप से विशाल तेल भंडार और खनिज संपदा पर कब्जा करने की मंशा से किया गया है। बयान में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन की किसी भी कोशिश को वेनेजुएला सिरे से खारिज करता है। सरकार के मुताबिक, “यह कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है। यह लंबे समय से चल रही उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण और हमारी राजनीतिक स्वतंत्रता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।”

मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की मांग
अमेरिका की कार्रवाई पर सबसे पहले और कड़ी प्रतिक्रिया चीन की ओर से आई। चीन ने कहा कि वह एक संप्रभु देश और उसके राष्ट्रपति के खिलाफ बल प्रयोग से बेहद हैरान है और इसकी कड़ी निंदा करता है। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि अमेरिका की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन है। चीन ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। चीन ने अमेरिका से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की मांग भी की। बयान में कहा गया कि किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को इस तरह जबरन ले जाना गलत है और इस संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।

रूस का सबसे कड़ा विरोध: अवैध सशस्त्र हमला
रूस ने अमेरिका की कार्रवाई की अब तक की सबसे तीखी आलोचना की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे “अवैध सशस्त्र हमला” करार देते हुए कहा कि इसे सही ठहराने का कोई औचित्य नहीं है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “वैचारिक शत्रुता ने व्यावहारिक समझदारी को हरा दिया है। अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और स्थापित मानदंडों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है।” रूस ने वेनेजुएला के लोगों के प्रति अपनी एकजुटता जताई और यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी हमले में किसी रूसी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा है।

ब्राजील की चेतावनी: खतरनाक मिसाल
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने अमेरिका की कार्रवाई को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि वेनेजुएला पर हमला और उसके राष्ट्रपति को गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बेहद खतरनाक मिसाल कायम कर रहा है। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय कानून का खुलेआम उल्लंघन कर किसी देश पर हमला करना हिंसा, अराजकता और अस्थिरता से भरी दुनिया की ओर पहला कदम है।” लूला ने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की कार्रवाइयों को रोका नहीं गया, तो भविष्य में कोई भी देश खुद को सुरक्षित नहीं मान सकेगा।

ईरान की प्रतिक्रिया: पूरी तरह अस्वीकार्य
ईरान ने भी अमेरिका के कथित सैन्य हमले की कड़ी निंदा की। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह वेनेजुएला की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है। ईरान के बयान में कहा गया, “एक संप्रभु देश पर अमेरिकी सैन्य हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।”

कोलंबिया सतर्क: सीमा पर बढ़ाई सुरक्षा
वेनेजुएला के पड़ोसी देश कोलंबिया ने हालात को देखते हुए अपनी सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है। कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने अमेरिका की कार्रवाई को लैटिन अमेरिका की संप्रभुता पर हमला बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संकट से क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन और बड़े पैमाने पर प्रवासन संकट पैदा हो सकता है। कोलंबिया सरकार ने अपनी सेना और सीमा सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा है।

स्पेन की मध्यस्थता की पेशकश
यूरोप से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। स्पेन ने इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान की पेशकश की है। स्पेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतने और तनाव कम करने की जरूरत है। मंत्रालय के अनुसार, “स्पेन इस संकट का शांतिपूर्ण और बातचीत के जरिए समाधान खोजने में मदद करने को तैयार है।”

मैक्सिको का रुख: संवाद ही एकमात्र रास्ता
मैक्सिको सरकार ने भी अमेरिका की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उसने कहा कि मौजूदा मतभेदों को सुलझाने के लिए संवाद और बातचीत ही एकमात्र वैध और प्रभावी माध्यम हैं। मैक्सिको ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और टकराव से बचने के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव भी रखा है।

अन्य देशों की प्रतिक्रिया और यूरोपीय संघ का बयान

बेलारूस, इक्वाडोर, उरुगुवे, चिली समेत कई देशों ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया। इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह अमेरिका को जवाबदेह ठहराए। यूरोपीय संघ ने भी बयान जारी कर कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान किया जाना चाहिए। ईयू की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन ने कहा, “संकट की इस घड़ी में यूरोपीय संघ वेनेजुएला के लोगों के साथ खड़ा है। देश में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बदलाव होना चाहिए।” हालांकि, ईयू ने सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं किया और बातचीत के जरिए समाधान पर जोर दिया।

अंतरराष्ट्रीय कानून और भविष्य की चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल अमेरिका और वेनेजुएला के बीच टकराव तक सीमित नहीं रहेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और वैश्विक शक्ति संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी देश के राष्ट्रपति के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई को सामान्य बना दिया गया, तो यह वैश्विक व्यवस्था को अस्थिर कर सकता है।

नजरें संयुक्त राष्ट्र पर

अब दुनिया की निगाहें संयुक्त राष्ट्र पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या किसी प्रकार की जांच या मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू होती है। फिलहाल, वेनेजुएला में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह संकट आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it