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उत्तर प्रदेश: ईंधन बचत और खर्च में कटौती की पहल, विधान परिषद समितियों के भ्रमण कार्यक्रम स्थगित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ईंधन बचाने और सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी प्रशासनिक और सरकारी गतिविधियों में संसाधनों के सीमित उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश: ईंधन बचत और खर्च में कटौती की पहल, विधान परिषद समितियों के भ्रमण कार्यक्रम स्थगित
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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ईंधन बचाने और सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में भी प्रशासनिक और सरकारी गतिविधियों में संसाधनों के सीमित उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही खुद के, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिले तथा सरकारी वाहनों के फ्लीट को 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय ले चुके हैं। अब इस पहल का असर विधान परिषद की गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने परिषद की संसदीय समितियों के पूर्व निर्धारित भ्रमण कार्यक्रमों को अगले आदेशों तक स्थगित करने के निर्देश जारी किए हैं। यह फैसला सरकारी संसाधनों की बचत और अनावश्यक यात्राओं को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि परिषद की विभिन्न संसदीय समितियों के भ्रमण संबंधी सभी कार्यक्रम फिलहाल निरस्त कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए आगामी आदेश जारी होने तक ये कार्यक्रम स्थगित रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि समितियों की कार्यवाही और बैठकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

जिला स्तर के अधिकारी अब संसदीय समितियों की बैठकों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। इससे एक ओर जहां प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर अनावश्यक यात्रा और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी।

सरकार की इस पहल को प्रशासनिक सादगी, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य विभागों और सरकारी संस्थाओं में भी इसी प्रकार के कदम देखने को मिल सकते हैं, ताकि सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण के लक्ष्य को भी प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।



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